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अमृत सरोवर योजना हेतु पौड़ी जिले में 75 सरोवर (तालाब) का होगा निर्माण

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 अमृत सरोवर योजना हेतु पौड़ी जिले में 75 सरोवर (तालाब) का होगा निर्माण

 पौड़ी जिले में पहाड़ी क्षेत्रों में पानी की कमी दूर करने के लिए जल शक्ति ’कैच द रैन’ जल संरक्षण अभियान के तहत जनपद में बनाये जा रहे अमृत सरोवर योजना हेतु 75 सरोवर (तालाब) का निर्माण कार्य किया जा रहा हैं। बनाये जा रहे सरोवरों, जल इकाइयों व तालाबों के अंतर्गत बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे द्वारा विकासखण्ड कोट के खाई तथा कल्जीखाल ब्लॉक के घंडियाल में भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यों की प्रगति का अवलोकन करते हुए जिलाधिकारी ने सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने वाटर बॉडी में जल एकत्रित करने के लिए उसके आसपास छोटी-छोटी नालियां बनाने तथा तालाब तक जल को एकत्र करने के निर्देश दिए।

     


  जिलाधिकारी ने जल निकाय को स्थानीय प्राकृतिक व धरातलीय स्वरूप के अनुसार नैसर्गिक रूप से निर्मित करने तथा ध्वजा रोहण व जल शक्ति अभियान के प्रतीक चिन्ह को दर्शाने वाली पेंटिंग बनाने के निर्देश भी दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि प्रकृति और उसके उपहार जल जंगल जमीन, वन्य जीव व समस्त प्राकृतिक वातावरण के फलने-फूलने से ही मनुष्य का अस्तित्व टिका हुआ है। इसलिए समस्त प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण तथा व्यवहारिक उपयोग करना जरूरी है ताकि प्रकृति प्रद्त ये खजाना हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए भी सुरक्षित रहे।
    उन्होंने लोगों से अपील की कि पानी का महत्व समझे। जितनी जरूरत हो दैनिक कार्यों में उतना ही पानी खर्च करें। कहा कि कहीं पर पानी लीकेज होते दिखाई देता है उसे तत्काल ठीक करवाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि पानी में कूड़ा-करकट व अन्य गंदगी ना डाले जिससे पानी किसी भी तरह से प्रदूषित न हो पाए। कहा कि वर्षा के पानी को परम्परागत व आधुनिक विधियों द्वारा एकत्रित करते हुए उसे सतही जल व भूमिगत जल के रुप में भूमि के अंदर प्रवाहित करें। इसके साथ ही उन्होंने आगामी मानसून सीजन के दौरान सभी लोगों से अपने आसपास खाली भूमि पर व्यापक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया तथा पर्यावरण संरक्षण के पुनीत कार्य में सबको अपनी सक्रिय भागीदार होने को कहा।
      इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह चौहान, खण्ड विकास अधिकारी कोट दिनेश बडोनी, बीपीडीओ सचिन भट्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


भारतीय सेना में भारी बदलाव की तैयारी


250 साल से ज्यादा समय से चल रही भारतीय सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया को  बदलने की तैयारी 


4 साल हो सकती है सेना की नौकरी, पेंशन व्यवस्था पर भी लग सकता है विराम


लड़ाकू जातियों की प्राथमिकता को भी खत्म किया जा सकता है.


250 साल से ज्यादा समय से चल रही भारतीय सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया को हमेशा के लिए बदला जा सकता है. साथ ही यह भी संभव है कि सेना में 250 सालों से चली आ रही जाति, धर्म या इलाके के आधार पर बनने वाली इंफेंट्री रेजिमेंट्स की तस्वीर पूरी तरह से बदल जाए. संभावना है कि सरकार इसी सप्ताह सैनिकों की भर्ती की नई योजना की शुरुआत कर सकती है जो भारतीय सेना में बहुत बड़ा बदलाव लाएगी. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस नई योजना की घोषणा इसी सप्ताह होगी और इसे अग्निपथ का नाम दिया गया है. इसके तहत सेना में केवल 4 साल के लिए सैनिकों की भर्ती की जाएगी और ये सैनिक अग्निवीर कहलाएंगे. इन सैनिकों को मौजूदा 9 महीने की जगह केवल 6 महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी और उसके बाद ये साढ़े तीन साल के लिए सेना में सेवा देंगे यानी भर्ती से लेकर रिटायर होने के बीच 4 साल सेना की नौकरी होगी.


सर्विस के दौरान इन सैनिकों को लगभग 30000 रुपये प्रति महीने वेतन मिलेगा जो सैनिकों को मिलने वाले मौजूदा वेतन से ज्यादा है. सर्विस के दौरान हर महीने सैनिक के वेतन का एक हिस्सा काटकर उसे जमा रखा जाएगा. सरकार भी उतनी ही रकम सैनिक के खाते में जमा कराएगी. ये रकम जो 10-11 लाख होगी उसे रिटायरमेंट के समय एकमुश्त मिलेगी.


25 फीसदी को ही मिलेगा स्थाई नौकरी का मौका 


सैनिक को रिटायर होने के बाद कोई पेंशन नहीं मिलेगी. सैनिक को सेवा के दौरान आईटीआई जैसे व्यावसायिक कोर्स भी करने का मौका मिलेगा जिनकी उसे रिटायर होने के बाद नई नौकरी में जरूरत होगी. रिटायर्ड सैनिक को कार्पोरेट सेक्टर में नई नौकरी के लिए बड़ी कंपनियों से संपर्क किया जा रहा है और महिंद्रा सहित कई कंपनियों ने तकनीकी रूप से प्रशिक्षित अग्निवीरों में दिलचस्पी दिखाई है. इन सैनिकों में से 25 प्रतिशत को उनके प्रदर्शन के अनुसार सेना में स्थाई नौकरी का मौका भी दिया जाएगा.


विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सेना को युवा रखने में मदद मिलेगी. हर साल पुराने सैनिकों में से ज्यादातर सेना से रिटायर हो जाएगें और नए युवा सैनिकों को मौका मिलेगा. भारतीय सेना की तादाद लगभग 13 लाख है और इनमें बड़ी तादाद नीचे के रैंक के सैनिकों की है. इन्हीं सैनिकों पर सैनिक कार्रवाइयों की जिम्मेदारी होती है.


नियमों में होंगे बड़े बदलाव


मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में सैनिकों को उनके रैंक के हिसाब से 40 या उससे भी ज्यादा उम्र में रिटायर किया जाता है. लेकिन इस तरह सेना में युवा सैनिकों की नई भर्ती नहीं हो पाती और सैनिकों की औसत उम्र भी बढ़ जाती है. नई प्रक्रिया से इस समस्या से निपटने में मदद मिलेगी. साथ ही अब रेजिमेंट्स में भर्ती अखिल भारतीय स्तर पर की जाएगी. अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही भर्ती प्रक्रिया में कुछ खास जातियों या धर्मों को सेना की भर्ती में प्राथमिकता दी जाती थी. अब भर्ती में इस तरह की लड़ाकू जातियों को प्राथमिकता को भी खत्म किया जा सकता है.

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