अजब-गजब जो इंडिया में संभव ….!एक सरकारी पहचान पर छः जगह सरकारी नौकरी
नौ वर्षों के सेवा काल में लगभग 4.5 करोड़ का सरकारी वेतन ले चुका सरकारी कर्मचारी
फर्रुखाबाद । इंडिया वर्तमान में डिजिटल युग में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी डिजिटल युग में इंडिया में मौजूदा दौर में कभी कभार अजब-गजब कारनामे देखने और सुनने को मिल जाते हैं। वैसे भी इंडिया में प्रतिभाओं की कमी नहीं। ऐसे आपको आज ऐसे प्रतिभाशाली की प्रतिभा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर हर पढ़ने वाला/वाली दांतों तले ऊंगली दबाने को मजबूर हो जाएंगे। यही नहीं इस प्रतिभाशाली की प्रतिभा से विभागों में अधिकारियों को दिन में तारे भी नजर आ गए
मामला उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का है जहां नियुक्ति और वेतन आहरण में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिसने विभाग चौंका दिया है। जहां युवाओं को सरकारी नौकरियां पाने के लिए जूते चप्पल घिस जाए रहे हैं वहीं उत्तर प्रदेश के एक प्रतिभाशाली युवा ने अपने कुशाग्र बुद्धि से छः जिलों के स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करके विश्व रिकार्ड बना दिया और विभागों भनक तक नहीं लग पाई। मामला उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद से शुरू हुए इस मामले में एक ही नाम और पहचान वाले अर्पित सिंह नाम के इस शख्स ने नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम सभी रिकॉर्ड में समान पाया गया, लेकिन इसके बावजूद वह छह अलग-अलग जिलों में एक ही समय पर नियुक्त होते हुए सभी जगह से वेतन आहरण भी किया। फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली—उत्तर प्रदेश के ये छह जिले अब इस फर्जीवाड़े की चर्चा में हैं। मानव संसाधन पोर्टल पर जब अर्पित सिंह का रिकॉर्ड जांचा गया, तो पता चला कि एक ही पहचान के छह कर्मचारी इन जिलों में काम कर रहे थे। चार का स्थायी पता भी समान पाया गया, जो इस पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से शुरू हुए इस मामले में अर्पित सिंह नाम के शख्स का नाम पिछले 9 सालों से एक्स-रे टेक्नीशियन के पद पर दर्ज था। सरकारी रिकॉर्ड में उनकी तैनाती हाथरस में बताई गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि वे मुरसान और अन्य पांच जिलों में भी नौकरी कर रहे थे। मानव संसाधन पोर्टल पर जब उनका डेटा खंगाला गया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली में छह अलग-अलग “अर्पित सिंह” काम कर रहा था।
यह मामला उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में प्रणालीगत गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन छह कर्मचारियों का नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि सभी समान थे। इसमें से चार का स्थायी पता भी एक जैसा पाया गया। यह स्थिति साफ़ दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों के रिकॉर्ड वेतन की बात करें तो एक अर्पित सिंह प्रति माह 69,595 रुपये ले रहा था। एक वर्ष में सिर्फ एक जिले से ही 8,35,140 रुपये की सैलरी ली गई। 9 सालों में केवल एक जिले से 75,16,260 रुपये का भुगतान हो चुका है। अगर छह जिलों के अर्पित सिंहों के वेतन जोड़ें, तो लगभग 4.5 करोड़ रुपये सिर्फ छः व्यक्तियों ने विभाग से हासिल कर लिए। फर्रुखाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन उप मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की एक जांच टीम गठित की है। उन्होंने बताया कि नियम-कानून के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है, लेकिन अब सवाल यह है कि यह जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित रहेगी या प्रणाली की जड़ों तक पहुँच कर बदलाव करेगी गंभीर धांधली हुई है।
साभार – चेतना मंच