1250 से अधिक बूथ के मतदाताओं में से 50 प्रतिशत दूसरे बूथों में शिफ्ट
निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति उम्मीदवार 30 लाख 80 हजार तक की धनराशि व्यय करने का प्रावधान
कलालघाटी पोलिंग बूथ में 1250 से अधिक मतदाता होने के चलते 50 प्रतिशत मतदाता दूसरे बूथ में शिफ्ट
आचार सहिंता लागू होने के बाद कोई भी राजनैतिक दल सरकार सम्पतियों पर चुनाव संबंधी सामाग्री नही लगा सकता
निजी संपत्ति पर चुनाव सामाग्री लगानी हेतु सम्बंधित मालिक से सहमति लेना जरूरी
आगामी विधान सभा सामान्य निर्वाचन-2022 को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं सफलतापूर्वक संचालन हेतु जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी गढ़वाल डॉ. विजय कुमार जोगदण्डे की अध्यक्षता में शनिवार को कलेक्ट्रेट कक्ष पौड़ी में राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बूथों का परिवर्तन तथा चुनाव सामाग्री दर के संबंध में बैठक आयोजित की गई। जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि 1250 से अधिक बूथ के मतदाताओं को 50 प्रतिशत दूसरे बूथों में शिफ्ट किया गया है। जिससे लोगों को मतदान हेतु परेशानियों का सामना नही करना पड़ेगा। उन्होंने उपस्थित राजनैतिक पार्टी के प्रतिनिधियों को कहा कि अपने ओर से भी मतदाताओं को बूथों की जानकारी देने हेतु जागरूक करें। जिससे उन्हें अपने-अपने बूथों की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही उन्होंने चुनाव सामाग्री पर चर्चा करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति उम्मीदवार हेतु 30 लाख 80 हजार तक की धनराशि व्यय करने का प्रावधान किया गया है, इससे ज्यादा प्रत्याशी खर्च नही कर सकता है।
जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. जोगदण्डे ने आयोजित बैठक में राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों को जानकारी देते हुए कहा कि जनपद में 05 बूथों का परिवर्तन किया गया है। कहा कि चौबट्टाखाल के प्राथमिक विद्यालय खालयूंडांडा पोलिंग बूथ में पेड़ गिरने से उच्चतर माध्यमिक खालयूंडांडा शिफ्ट किया गया है। साथ ही लैंसडाउन के जीजीआईसी लैंसडाउन बूथ को परिसर में ही दूसरे जगह शिफ्ट तथा कोटद्वार के पदमपुर पंचायत भवन में बूथ को 100 मीटर दूर स्थित बनाया गया है। इसके साथ ही गुरु राम रॉय पब्लिक स्कूल पदमपुर कोटद्वार तथा राजकीय प्राथमिक विद्यालय कलालघाटी पोलिंग बूथ में 1250 से अधिक मतदाता होने के चलते परिसर में ही दूसरे कक्षो में 50 प्रतिशत मतदाता शिफ्ट किये गए हैं। कहा कि जो मतदाता शिफ्ट किये गए हैं उनकी सूची भी तैयार की गई है। साथ ही उन्होंने चुनाव सामाग्री में चर्चा करते हुए कहा कि रूल 90 में प्रत्याशियों के खर्चे का विवरण समलित है। साथ ही उन्होंने कहा कि आदर्श आचार सहिंता लागू होने के बाद कोई भी राजनैतिक दल सरकार सम्पतियों पर चुनाव संबंधी सामाग्री नही लगा सकता है। उन्होंने राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों को कहा कि निजी संपत्ति पर चुनाव सामाग्री लगानी हेतु सम्बंधित मालिक से सहमति लेना जरूरी है।
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आरक्षी पुलिसकर्मियों का ग्रेड पे सरकार की गले हड्डी बना
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कोटद्वार। सितंबर अक्टूबर 2021 से आरक्षी पुलिसकर्मियों का का वेतन विसंगति, पेंशन और प्रमोशन की मांग ने सरकार की मुसीबतें बढ़ा दी है। गौरतलब है कि अक्टूबर माह में मुख्यमंत्री धामी ने पुलिस कर्मियों की 4600 ग्रेड पे मामले को संज्ञान में लेते हुए शीघ्र शासनादेश जारी करने की बात कही लेकिन तीन माह बाद भी शासनादेश जारी न होने से 2001 में भर्ती हुए आरक्षी पुलिस कर्मियों में खासी नाराजगी होने लगी है। आरक्षी पुलिसकर्मियों के अनुसार 20 साल सेवा करने के बाद भी न प्रमोशन,,न ग्रेड पे में सुधार , जबकि अन्य राज्यों में 20 साल सेवा करने के बाद प्रमोशन और ग्रेड पे दोनों मिला है वहीं राज्य के अन्य विभागों में भी प्रमोशन और ग्रेड पे की सुविधा मिली है तो आरक्षी पुलिस कर्मियों से भेदभाव क्यों ? आरक्षी पुलिस कर्मी अपने विभाग और सरकार के सौतेले भेदभाव से नाराज़ और सेवा में आरक्षियों के साथ बंधुवा मजदूर की तरह व्यवहार से खासे नाराज़ हैं। आरक्षी पुलिस कर्मियों का कहना है कि राज्य सरकार और उनका विभाग उनकी मानसिक तनाव से भरी सेवा को कम आंकने का काम कर रहा है वहीं उनके तीज त्यौहार पर अपने परिवार से दूर रहकर ड्यूटी करते हैं रात दिन परिजनों के दुख-सुख को नजरंदाज कर सेवा देते हैं उसके वावजूद न तो सरकार ने ही विभाग उनकी पीड़ा समझ रहा। ऐसी स्थिति में अब उनके पास अपना स्तीफा देने,या वीआरएस लेने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचता। इसी प्रकरण को लेकर अल्मोड़ा जिले के एक आरक्षी का विभाग को दिया इस्तीफा सोसल मीडिया और विभाग में जहां चर्चाओं में हैं वहीं राज्य सरकार और विभाग के लिए ढेर सारी मुसीबत बनने का सबब। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती राज्य की आरक्षी पुलिस कर्मियों द्वारा 8 जनवरी 20220 को काला दिवस मनाने की घोषणा ने सीधा संकेत दे दिया है, अगर आरक्षी पुलिस कर्मियों की मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता तो आगे आने वाले समय में पुलिस कर्मियों की नाराजगी झेलनी सरकार को भारी पड़ सकती है। अब देखना यह है कि पहले विभाग संज्ञान लेता है या फिर राज्य सरकार।