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अरबी गुलामी मानसिकता से ग्रसित शब्द “औरत” को बदला जाए – एक समाज श्रेष्ठ समाज

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

अरबी गुलामी मानसिकता से ग्रसित अरबी शब्द “औरत” को बदला जाए – एक समाज श्रेष्ठ समाज

भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है. वहीं भारतीय राष्ट्रीय भाषा हिंदी है. हिंदी भाषा आज पूरे विश्व में बोली जाने लगी है. हिंदी भाषा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस भाषा के अंतर्गत विश्व की कई भाषाओं के शब्द आमजन के बीच इस प्रकार रच बस गए हैं कि हम उन्हें अपनी दैनिक और आम बोलचाल की भाषा में जस के तस बोलने लगे हैं, न हमें उनका वास्तविक अर्थ मालूम है न ही यह मालूम है कि हिंदी भाषा का शब्द या विदेशी भाषा का. भारत का दुर्भाग्य रहा है कि वह मुगलों और अंग्रेज़ी शासन का सैकड़ों वर्षों तक गुलाम रहा. गुलामी का आलम यह रहा कि हमाररी संस्कृति,धार्मिक परम्पराएं, रीति रिवाज से लेकर भाषा तक विकृत कर दी गई. 

  भारतीय भाषा हिंदी के साथ भी कुछ ऐसा ही घिनौना खेल मुगल शासन काल में अरबी भाषा के वर्चस्व के चलते हिंदी शब्दावली से किया गया. हिंदी भाषा में शब्दों की विकृति पर भारतीय हिन्दी साहित्यकारों की अनदेखी भी समझ से परे नजर आई. “एक समाज श्रेष्ठ समाज” संस्था की विद्वत मंडली ने हिंदी साहित्यकारों व सरकार को ऐसे ही कुछ हिंदी शब्दावली में विकृत शब्दों की ओर ध्यान दिलाने काम किया है. संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू सदस्य प्रीति आर्या के नेतृत्व में संस्था के माध्यम से अरबी गुलामी की मानसिकता से ग्रसित मातृशक्ति के प्रति अपमानजनक औरत शब्द को हिंदी शब्दकोश से सम्पूर्ण भारत पूर्ण रूप से प्रतिबंध कर प्राथमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम से औ से औरत शब्द हटाने के लिए संस्था पदाधिकारियों ने हल्द्वानी सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह के द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज्ञापन भेजा.

इस दौरान एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू मार्गदर्शक पूजा लटवाल ने संयुक्त रूप से कहा की अरबी में औराह या औरत का मतलब महिला का गुप्तांग होता है फिर भी हमारे देश के विद्यालयों में बच्चों को बचपन से ही मातृशक्ति के प्रति अपमानजनक औ से औरत शब्द की पढ़ाई कराई जा रही है जिससे हम अपने देश के होनहार बच्चों को बचपन से ही अरबी गुलामी की मानसिकता से ग्रसित कर रहे है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण निंदनीय है क्योंकि जब हमारे देश के होनहार बच्चों की शिक्षा ही अंधकार में चली जाएगी तो हमारे भारत देश का भविष्य उज्जवल कैसे होगा इसलिए हम भारत सरकार से यह माँग करते है कि अरबी गुलामी की मानसिकता से ग्रसित औरत शब्द को सम्पूर्ण भारत में यथाशीघ्र प्रतिबंध कर विद्यालयों के पाठ्यक्रम से औ से औरत शब्द को हटाकर मातृशक्ति के सम्माननीय शब्द का प्रयोग किया जाए जिससे मातृशक्ति की गरिमा में कोई ठेस ना पहुँचे.

इस दौरान ज्ञापन देने में एक समाज श्रेष्ठ समाज संस्था संरक्षक हरीश चन्द्र पाण्डेय अध्यक्ष योगेन्द्र कुमार साहू उपाध्यक्ष लोकेश कुमार साहू सचिव नन्दकिशोर आर्या कोषाध्यक्ष बलराम हालदार समाजसेवी मनोज कुमार रवि गुप्ता मार्गदर्शक पूजा लटवाल प्रीती आर्या शौफाली जायसवाल चेतना लटवाल कंचन जोशी काजल खत्री जानकी रैगाई जानकी कश्यप नन्दकिशोर आर्या मुकेश साहू नवीन तिवारी संदीप यादव राजेश साहू सुशील राय मुकेश कुमार सूरज कुम्हार आदि लोग उपस्थित रहे.

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