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अल्मोड़ा का बिनसर जहां प्रकृति झूमकर बरसती है

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

बरसातों में बिनसर – फोटो निबंध

बरसातों में बिनसर - फोटो निबंध

 

अल्मोड़ा से करीब तीस किलोमीटर दूर स्थित बिनसर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी के घने जंगल बरसातों में इस कदर हरे हो जाते हैं कि आपको उनसे प्यार हो जाता है.

स्पेन के महान कवि फेडेरिको गार्सिया लोर्का अपनी एक कविता में लिखते हैं:

हरे, कितना तुझे प्यार करता हूं हरे!
हरी हवा, हरी टहनियां
समुन्दर में वो रहा जहाज़
और पहाड़ के ऊपर वह घोड़ा …
उस स्त्री की कमर के घेरे के गिर्द छाया
अपने छज्जे में स्वप्न देखती है वह
हरी देह, हरे ही उसके केश
और आंखों में ठण्डी चांदी
हरे, कितना तुझे प्यार करता हूं हरे
बंजारे चांद के नीचे
दुनिया की हर चीज़ उसे देख सकती है
जबकि वह नहीं देख सकती किसी को भी.

अल्मोड़ा से कुल तीस किलोमीटर दूर 2,420 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है बिनसर. यहाँ से हिमालय की जादुई छवियाँ देखने को मिलती हैं. प्रकृति की गोद में बसा यह स्थान बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य का हिस्सा है.

जंगल में वन्यजीवों और विविध प्रकार के पक्षियों की बहुलता है. यह स्थान पिछले कुछ वर्षों से पर्यटकों की फेहरिस्त में काफी ऊपर पहुंचा है.

बिनसर एक जादुई जगह है. मौसम चाहे कोई सा भी हो बिनसर का आकर्षण कभी कम नहीं होता. हिमालय के सुन्दर दृश्यों और जाड़ों की बर्फबारी के बाद वसंत का मौसम आता है.

यहाँ का वसंत एक तरह से रंगों, गंधों और सौन्दर्य का कोलाहलकारी आक्रमण होता है.

इसकी संगत में आने वाला हर व्यक्ति इसके पाश में बंध जाता है.

मानसून के समय बिनसर के जंगलों में उगी प्रचुर हरियाली इसे अमेज़न के किसी जंगल के समकक्ष बना देती है.

ऐसे प्यार करने लायक हरे से साक्षात्कार करना हो तो बिनसर से बेहतर जगह आपको नहीं मिलेगी.

सभी फोटो: अशोक पाण्डे

साभार – काफल ट्री

स्वदेशी जागरण मंच ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत से की मुलाकात

स्वदेशी जागरण मंच के प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुख्यमंत्री आवास मे मुलाकात की तथा देवभूमि उत्तराखंड मे सभी सरकारी योजनावो व कार्यालयों मे चीन की सभी कंपनियों व वस्तुओ के प्रतिबंद लगाने के एतिहासिक फैसला लेने पर आभार व्यक्त किया। प्रांत संयोजक सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि स्वदेशी जागरण मंच लम्बे समय से चीन की वस्तुवो के प्रयोग का देश भर मे बहिस्कार करने के लिये जागरुकता अभियान चलाता आ रहा है। सरकार के इस फैसले से जहां एक तरफ भारतीय सेना का मनोबल बढ़ेगा वहीं स्वादेशी कम्पनियों को प्रोत्साहन भी मिलेगा। इस अवसर पर प्रान्त संघर्षवाहिनी प्रमुख प्रवीण पुरोहित ने आभार पत्र पढा और मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि यह वर्ष स्वदेश जागरण मंच,भारतीय किसान संघ व भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दात्तोपंत ढंगरी जी के जन्म शताबदी वर्ष के रुप मे मना रही है और इसी क्रम मे विदेशी कम्पनियों के बहिस्कार के लिये और स्वदेशी को बढावा देने के लिये स्वदेशी स्वावलम्बन अभियान के तहत देश भर मे डिजीटल हस्ताक्षर  कराए गए थे। इस अभियान मे पर्वतीय राज्यों मे उत्तराखंड प्रथम स्थान मे रहा जिसमे मुख्यमंत्री ने भी स्वंम उत्साह पूर्वक प्रतिभाग किया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य चीन को आर्थिक,राजनैतिक,सामाजिक व सामरिक रुप से कमजोर करना व स्वदेशी को बढावा देना था।इस पूरे विषय को मुख्यमंत्री ने पूरी गम्भीरता और ऊत्साहपूर्वक अपने फेसबुक मे भी अपलोड किया। इस अवसर पर हुई वार्ता मे प्रवीण पुरोहित ने मुख्यमंत्री से कोटद्वार के विभिन्न विषयों व जनसरोकारों पे लम्बी चर्चा की जिसमे विशेष रुप से लोकनिर्माण विभाग की सड़कों की बत्तर हालत, लघु सिंचाई एवं सिंचाई की क्षतिग्रस्त नहरों के कारण किसानो को होने वाले समस्याओं, कर्णश्रम मे स्वजल विभाग द्वारा प्रस्ताव न भेजे जाने, कर्णश्रम की क्षतिग्रस्त मार्ग,पेयजल, उद्यान से सम्बन्धित,डिग्री कॉलेज के खेल मैदान का विस्तार अभी तक न होने से सम्बंधित,आपदा मद से भी कोटद्वार मे विभिन्न कार्य करवाने आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा की।साथ ही अर्धसैनिक कैन्टीन के लिये जमीन को सीघ्र चयनित करने की मांग की। इस अवसर पर नरेंद्र रावत, इन्द्रमनी गैरोला,महरबान रावत,कृष्ण सिंह नेगी, आधार वर्मा उपस्थित रहे।

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