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ड्रीम इंडिया एडवाइजरी ने आईटीआई दुगड्डा में आयोजित किया उद्यमिता सेमिनार

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

   ड्रीम इंडिया एडवाइजरी ने आईटीआई दुगड्डा में आयोजित किया उद्यमिता सेमिनार 

  युवाओं का पलायन रोकने और अवरोधमुक्त वातावरण पर समाज बदलाव का एक प्रयत्न

कोटद्वार /दुगड्डा। मंगलवार को तकनीकी शिक्षा के साथ साथ सरकारी गैर-सरकारी और स्वरोजगार उद्यमिता के  लिए तकनीकी प्रशिक्षण ले रहे  युवा विद्यार्थियों के  लिए आईटीआई दुगड्डा में आयोजित एक अद्वितीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ई.डी.पी.) ने 100 से अधिक विद्यार्थियों को उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया। ड्रीम इंडिया एडवाइजरी के माध्यम से आयोजित इस सेमिनार में आईटीआई के प्रधानाचार्य  त्रिलोचन सुंदरियाल के नेतृत्व में फैकल्टी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सरकारी नौकरी और प्राइवेट नौकरी के साथ ही स्वरोजगार के विभिन्न आयामों से अवगत कराना था। विशेषज्ञ और ट्रेनर कमल बहादुर ने 2 घंटे तक विद्यार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण लेने के बाद सरकारी और गैर-सरकारी प्रतिष्ठानों में रोजगार के अतिरिक्त स्वरोजगार के क्षेत्र में अपार संभावनाओं की जानकारी देते हुए अपने कैरियर को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के गुरुमंत्र दिए। वहीं दिव्यांगता समावेश और अवरोधमुक्त वातावरण के विशेषज्ञ रितांशी धस्माना ने एक्सेसिबिलिटी ऑडिट किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने छह समूहों में विभाजित होकर अपने बिजनेस आइडियाज प्रस्तुत किए, जिनमें खाद्य प्रसंस्करण, प्रवासन रोकने के उपाय, टेक्निकल शिक्षा, कला और संस्कृति का संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। यह प्रयास पहाड़ी और भौगोलिक क्षेत्रों में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां के युवाओं को उद्यमिता के बारे में समझाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

आईटीआई के संयोजक  कपूर जी ने धन्यवाद प्रस्ताव में इस सेमिनार को अपनी तरह का अनोखा और प्रेरणादायक प्रयास बताया। प्रधानाचार्य सुंदरियाल जी ने कमल बहादुर और रितांशी धस्माना का धन्यवाद करते हुए, इस प्रकार के आयोजन को अन्य संस्थानों में भी लागू करने की संभावना व्यक्त की।

इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य न केवल विद्यार्थियों को उद्यमिता के प्रति जागरूक करना है, बल्कि उन्हें भविष्य में स्वरोजगार के अवसरों को पहचानने और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना भी है। यदि इस पहल को सही ढंग से जमीन पर उतारा जाए, तो यह पहाड़ों में पलायन को रोकने और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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