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राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट नका बड़ा फैसला लगाई रोक, पुनर्विचार तक नहीं दर्ज हो सकेंगे नए केस

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला लगाई रोक, पुनर्विचार तक नहीं दर्ज हो सकेंगे नए केस 

पुनर्विचार तक राजद्रोह कानून यानी 124ए के तहत कोई नया मामला दर्ज न हो 

बिना जिला पुलिस कप्तान यानी एसपी या उससे ऊंचे स्तर के अधिकारी की मंजूरी के राजद्रोह की धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी

तीन जजों की बेंच राजद्रोह कानून की वैधता पर सुनवाई कर रही है. इस बेंच में चीफ जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली शामिल



नई दिल्ली: बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है, जिसके दूरगामी परिणाम सकारात्मक आने की संभावना बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जहां सत्ताधारी राजनीति की अपने प्रतिद्वंद्वीयों के खिलाफ कार्रवाई करने में काफी हदतक रोक लग सकेगी वहीं कानून का राजनैतिक दुरुपयोग भी कम हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि पुनर्विचार तक राजद्रोह कानून यानी 124ए के तहत कोई नया मामला दर्ज न किया जाए। केंद्र इस बाबत राज्यों को निर्देशिका जारी करेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि जो लंबित मामले हैं उनपर यथास्थिति रखी जाए। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि जिनके खिलाफ राजद्रोह के आरोप में मुकदमे चल रहे हैं और वो इसी आरोप में जेल में बंद हैं वो जमानत के लिए समुचित अदालतों में अर्जी दाखिल कर सकते हैं। अब इस मामले की सुनवाई जुलाई के तीसरे हफ्ते में होगी।

राजद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हमने राज्य सरकारों को जारी किए जाने वाले निर्देश का मसौदा तैयार किया है। उसके मुताबिक राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश होगा कि बिना जिला पुलिस कप्तान यानी एसपी या उससे ऊंचे स्तर के अधिकारी की मंजूरी के राजद्रोह की धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. इस दलील के साथ सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा कि फिलहाल इस कानून पर रोक न लगाई जाए।

सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को ये भी बताया कि पुलिस अधिकारी राजद्रोह के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने के समर्थन में पर्याप्त कारण भी बताएंगे। उन्होंने कहा कि कानून पर पुनर्विचार तक वैकल्पिक उपाय संभव है। आंकड़ों की बात पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ये तो जमानती धारा है, अब सभी लंबित मामले की गंभीरता का विश्लेषण या आकलन कर पाना तो मुश्किल है। लिहाजा ऐसे में कोर्ट अपराध की परिभाषा पर रोक कैसे लगा सकती है? यह उचित नहीं होगा. जबकि याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील रखते हुए वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से मांग रखी थी कि राजद्रोह कानून पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है।

कानून का दुरुपयोग होने पर करना पडा हस्तक्षेप – अटार्नी जनरल

इन तमाम दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने राजद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है। इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है. इसकी पुष्टि अटॉर्नी जनरल ने भी अपने मंतव्य में साफ कही है। कोर्ट ने कहा कि जिनके खिलाफ देशद्रोह के आरोप में मुकदमें चल रहे हैं और वो इसी आरोप में जेल में बंद हैं वो जमानत के लिए समुचित अदालतों में अर्जी दाखिल कर सकते हैं। क्योंकि केंद्र सरकार ने इस कानून पर पुनर्विचार के लिए कहा है, लिहाजा कोर्ट ने कहा है कि जब तक पुनर्विचार नहीं हो जाता तब तक इस कानून के तहत कोई केस नहीं होगा। साथ ही लंबित मामलों में भी कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।

बता दें कि अभी तीन जजों की बेंच राजद्रोह कानून की वैधता पर सुनवाई कर रही है. इस बेंच में चीफ जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं। इस मामले में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि सरकार ने राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार और उसकी पुन: जांच कराने का निर्णय लिया है. केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया है कि वो राजद्रोह कानून की धारा 124 A की वैधता पर फिर से विचार करेगी। लिहाजा, इसकी वैधता की समीक्षा किए जाने तक इस मामले पर सुनवाई न करे. लेकिन कोर्ट ने केंद्र के इस पक्ष को नहीं माना है और कानून पर रोक लगा दी है।

 एंड्रॉइड यूजर्स पर काल रिकार्डिंग पर लगी रोक, ऐप्स को नहीं कर पाएंगे इस्तेमाल 

   पिछले महीने, Google ने Play Store से सभी कॉल रिकॉर्डिंग ऐप्स पर बैन लगाने की घोषणा की थी। Google Play Store पॉलिसी में बदलाव आज 11 मई  बुधवार से लागू हो गया। हालांकि जो इनबिल्ट कॉल रिकॉर्डिंग फीचर ऐप है उनका कुछ नहीं होगा और उसका इस्तेमाल कर पाएंगें। तो यदि आपके स्मार्टफोन में कॉल रिकॉर्ड करने के लिए कोई इनबिल्ड नेटिव कॉल रिकॉर्डिंग ऐप नहीं है, तो आप कॉल को रिकॉर्ड नहीं कर पाएंगे और न ही कोई ऐप इंस्टॉल कर पाएंगे।


आज से कॉल रिकॉर्डिंग ऐप्स हो जाएंगे बैन

गौरतलब हो कि टेक दिग्गज पिछले कई वर्षों से कॉल रिकॉर्डिंग ऐप्स (Call Recording Apps) के खिलाफ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कंपनी का मानना है कि कॉल रिकॉर्ड करना यूजर्स की प्राइवेसी का हनन है। उसी के कारण, गूगल के अपने डायलर ऐप पर कॉल रिकॉर्डिंग फीचर पर दिया है। इस फीचर से यूजर्स को पता चल जाता है कि उनकी कॉल को रिकॉर्ड किया जा रहा है।

Google ने स्पष्ट किया है कि बदलाव केवल थर्ड-पार्टी ऐप्स को प्रभावित करेगा। इसका मतलब है कि Google डायलर पर कॉल रिकॉर्डिंग तब भी काम करेगी जब वह आपके डिवाइस या क्षेत्र पर उपलब्ध हो। यह भी स्पष्ट करता है कि कॉल रिकॉर्डिंग फीचर वाला कोई भी प्रीलोडेड डायलर ऐप पूरी तरह से ठीक काम करेगा। यानी जो ऐप्स Google Play स्टोर पर उपलब्ध हैं उन्हीं को बैन और हटाया जाएगा।

Truecaller ने हटा दिया कॉल रिकॉर्डिंग फीचर

Google द्वारा कॉल रिकॉर्डिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा के एक दिन बाद, Truecaller ने अपने प्लेटफॉर्म से कॉल रिकॉर्डिंग फीचर को हटा दिया था। ट्रूकॉलर के प्रवक्ता ने कहा, “अपडेट की गई Google डेवलपर डेवलपर पॉलिसी के अनुसार, हम अब कॉल रिकॉर्डिंग की पेशकश करने में असमर्थ हैं। यह उन डिवाइसों को प्रभावित नहीं करेगा जिनके पास डिवाइस में मूल रूप से इनबिल्ड कॉल रिकॉर्डिंग फीचर है।”

 थर्ड-पार्टी कॉल रिकॉर्डिंग ऐप्स को इंस्टॉल अब नहीं कर पाएंगे इस्तेमाल

 

नई पॉलिसी के बाद आज से गूगल अपने प्ले स्टोर से सभी कॉल रिकॉर्डिंग ऐप्स को हटा रहा है और जिन्होंने ऐप्स को इंस्टॉल कर रखा है वो भी काम करना बंद कर देंगे। इस प्रकार अब सिर्फ इनबिल्ड कॉल रिकॉर्डिंग फीचर से ही किसी कॉल को रिकॉर्ड कर पाएंगे।

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