रामनगर में साहित्य संगोष्ठी, कवियों ने छोडे खट्टे मीठे तीर
मुकद्दर में लिखी खुशियाँ तो गम फिर मिल नहीं सकता
हुनर है हाथ में मेरे तो भूखा मर नहीं सकता
काव्य संकलन ‘अतीत के आकाश में’ का विमोचन
रामनगर 3 जुलाई। बिना बंदूक,तीर, तलवार के बड़े बड़े महारथियों को धूल चटाने वाले कलम के योद्धाओं का कैम्प उत्तराखंड के रानगर में आयोजित हुवा। कलम के योद्धाओं का हिंदी साहित्य भारती अंतरराष्ट्रीय, के वैनर तले जनपद नैनीताल उत्तराखंड द्वारा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर में जनपद पदाधिकारी सम्मेलन एवं साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें विविध साहित्यिक गतिविधियों के साथ-साथ हिंदी साहित्य भारती अंतर्राष्ट्रीय के उद्देश्यों तथा भावी कार्य योजनाओं पर चर्चा की गई।
नैनीताल जिले के अध्यक्ष गणेश रावत द्वारा सभी आगंतुक साहित्य साधकों का स्वागत किया गया। हिंदी साहित्य भारती उत्तराखंड के प्रदेश महामंत्री श्री दिनेश चंद्र पाठक ने हिंदी साहित्य भारती अंतरराष्ट्रीय के केंद्रीय अध्यक्ष तथा पूर्व शिक्षामंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार डॉ रवींद्र शुक्ल जी के जीवन परिचय, संगठन की संकल्पना तथा उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद संगठन के नैनीताल जनपद के उपाध्यक्ष डॉ सत्य प्रकाश मिश्रा के सद्यः प्रकाशित काव्य संकलन ‘अतीत के आकाश में’ का विमोचन किया गया। इसके बाद काव्य गोष्ठी का प्रारंभ करते हुए प्रदेश मंत्री डॉ बीना जोशी जी ने सरस्वती वंदना
‘मन में जला कर दिया
खोल चक्षु ज्ञान वाले
आज करें वंदना मां
आज करें अर्चना।। से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
तत्पश्चात डॉ. सोनी पंत ने केदारनाथ आपदा के वर्णन कुछ इस प्रकार किया-
हे केदार के नाथ तुम क्यों रुष्ट हुए
हे भोले भंडारी तुम क्यों क्षुब्ध हुए
ऐसी क्या करनी कर डाली भक्तों ने
जो आशुतोष भगवान इतने रुष्ट हुए।।
सगीर अशरफ ने श्रोताओं का ध्यान अपनी और कुछ इस प्रकार आकर्षित किया-
खालीपन का पहला तनाव
देखना एक दिन
प्रेम के दृढ़ निश्चय को
नफरत के शब्दों से हटाकर
जीवन उत्कर्षों में
समेटने को आतुर होगा ।।
मितेश्वर आनंद ने साहित्य में हाशिए पर खड़े आदमी की पीड़ा के लुप्त होते जाने पर अपनी चिंता व्यक्त की इसके पश्चात उन्होंने अपनी कहानी मान्यवर का भावपूर्ण वाचन किया।।
डॉ. दुर्गा तिवारी जी ने अपनी रचना ‘ठूँठ’ कुमाऊनी भाषा में प्रस्तुत की, जिसमें एक पेड़ के ठूँठ का मानवीकरण करते हुए उसकी भावनाओं का सुंदर वर्णन किया गया।।
वर्तमान साहित्य के समक्ष उपस्थित चुनौतियों की चर्चा करते हुए असलम कोहरा ने स्तरीय साहित्य की उपलब्धता में कमी तथा साहित्यकारों की निर्धनता आदि पर अपने विचार रखे। संगठन के मार्गदर्शक मंडल की सदस्य डॉ प्रभा पंत जी ने अपनी रचना कुछ यों प्रस्तुत की-
सूर्यप्रभा हूँ मैं अंधकार मिटाने आई हूँ
आच्छादित थे अब्र कल तक मैं इन्हें हटाने आई हूँ।।
डॉ. पुष्पलता जोशी जी ने अपने भावों को कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया आओ बृजनारी सबै
आज कान्हा अवतरे हैं।।
संगठन के जनपद महामंत्री डॉ अनुपम शुक्ल ने अपनी रचना कुछ यूँ प्रस्तुत की-
मुकद्दर में लिखी खुशियाँ तो गम फिर मिल नहीं सकता
हुनर है हाथ में मेरे तो भूखा मर नहीं सकता।।
जनपद उपाध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार गोल्डी जी ने ऊर्जा से भरपूर अपने मुक्तक प्रस्तुत कर सबकी वाहवाही लूटी। राजाराम विद्यार्थी ने जातिवाद पर चोट करती अपनी रचना प्रस्तुत की।।
डॉ गिरीश चंद्र पंत ने अपने रोचक अंदाज में समाज तथा साहित्य पर अपनी बातें रखी जिसमें उन्होंने साहित्य के प्राचीन से लेकर वर्तमान तक के सफर पर अपने विचार रखें साथ ही स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी के योगदान पर प्रकाश डाला।
डॉ. शत्रुघन सिंह ने विद्यालयी पाठ्यक्रम में हिंदी साहित्य की उपेक्षा पर अपने सारगर्भित विचार रखते हुए कहा कि विद्यालयी पाठ्यक्रम में हिंदी की महत्ता का समझा जाना आवश्यक है।युवा कवि देवेश उपाध्याय ने अपने सुमधुर गीत से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया।डॉ0 रामचंद्र पाण्डेय ने
भावना की भूमि यदि बंजर हुई,
सृजन की संभावना मर जाएगी।
शुष्क हो जाएगी यदि सम्वेदना,
यजन की मन-कामना मर जाएगी। द्वारा कविता में अनुभूति और अभिव्यक्ति के बीच के आंतरिक द्वंद्व को प्रस्तुत किया। प्रदेश मंत्री डॉ भगवती पनेरु ने सुमधुर स्वर में अपनी रचना कुछ इस प्रकार प्रस्तुत की-
पास रखना दिल के दिल से दूर मत करना
जो नारी की है सुंदरता उसे तुम दूर मत करना
जो कन्या पूजन करते हो वो भक्ति दूर मत करना
हुई हों भूले लाखों पर मगर अब भूल मत करना।।
प्रदेश मंत्री डॉ. बीना जोशी जी ने कहा कि हमें भविष्य के प्रति आशान्वित रहते हुए निरंतर साहित्य संवर्धन हेतु सतत प्रयास करते रहना है। साथ ही उन्होंने अपनी रचना कुछ यूँ प्रस्तुत की-
जिंदगी ने कहा हमसे कुछ मीठा तो हो जाए।।
संगठन के प्रदेश महामंत्री श्री दिनेश चंद्र पाठक ने श्रृंगार रस से संबंधित अपनी रचना प्रस्तुत की-
सुनो तुमसे यूं ही बातें करना अच्छा लगा
बोला कम, तौला ज्यादा, मगर अच्छा लगा।।
कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम अध्यक्ष श्री सत्य प्रकाश मिश्र जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन से किया जिसमें उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित दूर-दूर से आए सभी कवियों अतिथियों तथा अन्य सम्मानित सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य भारती जनपद नैनीताल के उपाध्यक्ष डॉ प्रमोद कुमार गोल्डी जी द्वारा सभी उपस्थित कवियों तथा अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए।