गेहूं बिक रहा मिट्टी के भाव, भूसा बना सोना
भूसा रुला रहा पशुपालकों को, भूसे के लिए पशुपालकों में हाहाकार
सीजन में ही भूसे की कीमत में भारी उछाल, 800 से ₹1000 कुंतल बिक रहा कोटद्वार गढ़वाल में भूसा
कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों में पशुपालकों को भूसे की कमी के कारण रुला कर रख दिया है। कोटद्वार के आसपास क्षेत्रों में गेहूं की कम बुवाई होने से भूसे की जरूरत कोटद्वार से सटे यूपी के बिजनौर जिले के किसानों से भूसी की आपूर्ति की जाती है। कोटद्वार के पशुपालक इन यूपी के बिजनौर जिले के किसानों पर ही भूसे और गेहूं के लिए निर्भर रहते हैं। यूपी के किसान भी कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों में भूसे सप्लाई से फसल के समय में अच्छी कमाई कर लेते हैं । सर्दियों के सीजन में भूसा पंद्रह सौ से ₹1600 कुंटल बिकने से इस बार पशुपालक पूरे साल भर के लिए भूसा स्टोर के जुगाड़ में जुट गए । कई पशुपालकों ने तो गेहूं की खड़ी फसल मैं ही यूपी के किसानों से भूसे की कीमत तय कर ली अब हालात यह है कि कोटद्वार में भूसा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। 1- 2 पशु पालने वाले किसान भूसा न मिलने से भारी परेशानी में है। पशुपालक भूसा ना मिलने के कारण भरी दुपहरी में यूपी के गेहूं फसल बोए क्षेत्रों में भूसे के लिए भटक रहे हैं। वही यूपी के किसान भी गेहूं की अपेक्षा भूसे से खूब कमाई कर रहे हैं। वर्तमान में भूसा बेचने वाले कोटद्वार में गेहूं के भूसे की कीमत आठ सौ से ₹1000 कुंटल में बेच रहे हैं। ट्रैक्टरों से भूसा सप्लाई करने वाले किसानों का कहना है कि यूपी बार्डर और कोटद्वार कौड़ियां पर कुछ पुलिस कर्मियों द्वारा प्रति ट्रैक्टर 100 से 300 रुपए वसूले जा रहे हैं। कोटद्वार के पशुपालकों का कहना है कि वे अपनी पशुओं की जरूरत के हिसाब से भूसा फसल के समय स्टोर कर लेते हैं, परन्तु इस बार गैर पशुपालकों द्वारा भूसा स्टोर किया जाने लगा है जिनमें व्यापारियों द्वारा मनमाने दाम पर भूसा खरीदा जा रहा है जिस कारण छोटे पशुपालक हतोत्साहित हो रहे हैं। अधिकांश छोटे पशुपालकों ने तो अपने दुधारू पशु बेचने भी शुरू कर दिए हैं। वहीं यूपी के भूसा सप्लाई करने वाले किसानों से भूसे की कमी का कारण पूछा तो उनके अनुसार बड़े और मझोले किसानों ने बड़ी हुई मजदूरी और मजदूरों की कमी के चलते कम्बाईन मशीन से गेहूं की फसल कटवाई है,कम्बाईन मशीन से भूसा नहीं बनने के कारण भूसा नहीं मिल पा रहा है।

