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उत्तराखंड में किसानों के लिए क्या मौत का सिस्टम तैयार हो रहा……?

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

  उत्तराखंड में किसानों के लिए क्या मौत का सिस्टम तैयार हो रहा……? 

 कोटद्वार।  उपरोक्त खबर का संज्ञान लेते हुए मन में विचार आया कि पहाड़ की शांत वादियों में भी अन्नदाता को सरकारी तंत्र से प्रताड़ना के चलते आत्महत्या जैसे विकट तरीके को अपनाना पड़ेगा। जिस प्रकार पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के पहाड़ों से लेकर तराई और भाबर में भू माफिया भ्रष्ट सरकारी तंत्र के साथ मिलकर सीधे साधे किसानों का उत्पीड़न,डरा धमकाकर जमीनों को कब्जाने का काम कर रहे हैं वह भविष्य के उत्तराखंड के लिए बहुत गंभीर और चिंताजनक परिस्थितियों को जन्म देने का काम कर रहे हैं।
 गौरतलब है कि उत्तराखंड के तराई क्षेत्र हल्द्वानी के गौलापार इलाके के एक मेहनती किसान ने शासन प्रशासन पर आरोप लगाते हुए स्वयं की गोली मारकर आत्महत्या की और विशेषकर पुलिस, तहसील प्रशासन और दबंग भू माफियाओं को जिम्मेदार ठहराते हुए आत्मघाती निर्णय लिया वह बहुत पीड़ादायक है।
 दिवंगत सुखवंत सिंह की मार्मिक वीडियो ने राज्य सरकार के किसानों की हितैषी होने का जो ढिंढोरा पीटना उसकी पोल खुलकर रह गई। जिस प्रकार सुखवंत ने पुलिस और तहसील प्रशासन पर आरोप लगाकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया उससे तो लगता है कि उत्तराखंड की मित्र पुलिस को परमवीर चक्र, तहसील प्रशासन को पद्मभूषण और भू माफियाओं को पद्मश्री से पुरूस्कृत कर देना चाहिए….! 
 दिवंगत किसान सुखवंत का अंतिम बयान हर किसान, संवेदनशील व्यक्ति और मेहनती की वह आवाज है जो उत्पीड़न की पराकाष्ठा के बाद ही कह सकता है कि ” मैं मर रहा हूं, मेरे समस्त अंगों को बेचकर पुलिस को दे देना।” सुखवंत आज हमारे बीच नहीं परन्तु उत्तराखंड पुलिस सिस्टम और राज्य सरकार को वह ऐसा दाग देकर चला गया जिसे धोने और साफ करने में में धोनी सरकार और पुलिस को लोहे के चने चबाने होंगे।
 सुखवंत सिंह की आत्महत्या का प्रकरण में भले ही राज्य सरकार के निर्देश पर कुछ पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है परन्तु यह पूरी कार्यवाही नहीं कह सकते जब तक सुखवंत द्वारा नामित समस्त लोगों पर दंडात्मक से लेकर आर्थिक दंड के साथ कार्यवाही नहीं होती। उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में भोले-भाले अन्नदाता को आत्मघाती कदम उठाने के समस्त मामलों का संज्ञान लेते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही होनी जरूरी है जिससे भविष्य में अन्नदाता को इस प्रकार का कदम न उठाना पड़े।

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