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कलम और कैमरे का दर्द

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

वैश्विक महामारी कोरोनावायरस ने आज पूरे देश को हलकान किया हुआ है, वहीं पूरा विश्व भी इसकी चपेट में आकर त्राहिमाम त्राहिमाम करने को विवश है। पूरे विश्व की सरकारें विभिन्न माध्यमों से अपने देश की जनता को सचेत करने पर जुटी है। इसमें सबसे प्रमुख है मीडिया। चाहे वह सोशल मीडिया हो, प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया।क्या आप लोग जानते हैं यह मीडिया किन हालातों में कैसे खतरे मे पल पल की खबरें आप तक पहुंचाने का काम कर रहा है। भारत के संदर्भ में बात करें तो एक छोटे से गली कूचे से लेकर बड़े-बड़े शहरों तक की खबरें आम आदमी के मोबाइल, टीवी और अखबार के माध्यम से देश की जनता को घर बैठे मिल रही है, सरकार को मिल रही है। वह मीडिया ही था जिसने सरकारों को कोरोनावायरस के गंभीर आपदाओं से पूर्व में ही सचेत कर दिया था कि एक अनजानी बीमारी चीन में सक्रिय है, जो हवा के द्वारा फैल रही है। उसमें बीमारी के लक्षण तक नहीं दिखाई दे रहे हैं इसके लिए सरकारों को अपने यहां तैयारी कर लेनी चाहिए। मीडिया यह भी बताने में सक्षम रहा था कि यह बीमारी चीन से शुरू हो चुकी है। इस बीमारी धीरे-धीरे अगर काबू नहीं पाया गया तो पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले सकती है। लेकिन सरकारों की लेटलतीफी आज पूरे विश्व पर भारी पड़ रही है, अब आनन-फानन में सरकारी निर्णय लेने पर लगी हैं। इसी निर्णय में सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लाक डाउन का भी लिया गया है। वर्तमान में मीडिया के माध्यम से सरकारों के अधिकारी आम जनमानस से लेकर बीआईपी तक मीडिया पर निर्भर है, कि कहां पर क्या स्थिति बनी हुई है और सरकार इसके लिए क्या प्रयास कर रही है, किन जगहों पर सरकार को सफलता ही नहीं मिल रही हैं, किन जगहों पर सरकारों की कमियां नजर आ रही है, कैसे सरकार इनको संभाल सकती हैं, आम जनजीवन को किन तकलीफों से गुजरना पड़ रहा है। यह सब आपको मीडिया के माध्यम से ही मिल रहा है, और यह मीडिया सोशल मीडिया के रूप में, प्रिंट मीडिया के रूप में तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रूप में चौबीसों घंटे रात दिन आपकी सेवा में अपनी जान की परवाह किए बिना जुटा हुआ है।आप सब ने देखा सुना और पढ़ा होगा कि केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार ने एक गरीब मजदूर, विकलांग, विधवा, निराश्रित, गरीब जरूरतमंद, किसान डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, सफाई कर्मी, स्वास्थ्य कर्मी, कर्मचारी चाहे वह प्राइवेट हो या सरकारी सभी के लिए कुछ ना कुछ घोषणा की है,क्या आपने केंद्रीय या राज्य सरकारों द्वारा किसी घोषणा में कहीं पढ़ा सुना या देखा जो मीडिया कर्मी ग्राउंड जीरो से  कैमरे और कलम के माध्यम से आपको पल-पल की खबरें पहुंचा रहा है, उनके लिए सरकार ने अब तक तालियों, घंटियों, शंख ध्वनि के अलावा कुछ किया है। पाठकों व दर्शकों में आपको अवगत कराना चाहता हूं कि स्वतंत्र मीडिया का कैमरामैन और कलम का सिपाही जो ग्राउंड जीरो पर जाकर अपनी जान की परवाह किए बिना पूरा जोखिम लेकर अपने परिवार की परवाह किए बिना आपको पल-पल के घटनाक्रम से अवगत करा रहा है, उसके पास आज न तो संसाधन है ना सुरक्षा है, यहां तक कि कुछ मीडिया कर्मियों के पास स्कूटर बाइक में पेट्रोल भरने तक के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं। फिर भी वह अपने काम को जान की परवाह किए बिना, जी-जान से जुटा है । कई मीडिया कर्मियों के घरों में राशन और बच्चों की फीस तक के पैसे नहीं बचे। चौबीसों घंटे आम जनमानस और सरकार के लिए निस्वार्थ भाव से काम कर रहा है यह कलम का सिपाही और कैमरामैन बिना संसाधनों के कैसे काम कर रहा है, आपको बताता चलूं कि आज कुछ बड़े-बड़े प्रतिष्ठान चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक की हो या प्रिंट मीडिया के अपने कर्मचारियों के शोषण में भी पीछे नहीं हैं दो हजार से लेकर ₹10000 मासिक पर 24 घंटे इन  कलम के सिपाही और कैमरामैन से काम करवाया जा रहा है। सुरक्षा के नाम पर इनको ठेंगा दिखाया जा रहा है । अपने बलबूते या अपने परिचय से ही यह अपने लिए सुरक्षा के साधन उपलब्ध करा पा रहे हैं। बड़े प्रतिष्ठानों के द्वारा अपने इन कलम के सिपाही और कैमरामैंने को ब्रांड नाम का आईडी कार्ड और एक माइक जिस पर ब्रांड का लोगो लगा हुआ वह दिया जाता है इसके अलावा शायद ही कोई मीडिया प्रतिष्ठान अपने कर्मचारियों को सैनिटाइजर दे रहा हो, मास्क दे रहा हो, ग्लब्ज दे रहा हो, सुनने में अभी तक नहीं आया। लेकिन अगर हम सोशल मीडिया की बात करें तो इस मीडिया वर्ग के कुछ पोर्टल संचालक और स्वयं पोर्टल चलाने वाले सोशल मीडिया कर्मी की हालत तो बद से बदतर है अभी तक इन मीडिया कर्मियों द्वारा अपने आय के लिए निजी विज्ञापनों के माध्यम से अपने परिवार का भरण पोषण किया जाता था, जो विज्ञापन  स्थानीय स्तर पर ही मिलते थे, लेकिन कोरोनावायरस ने आर्थिक मंदी के चलते उनके मुंह से यह निवाला भी छीन लिया।इसलिए मेरा सरकार से अनुरोध है जो मीडिया का कैमरामैन या कलम का सिपाही आपको ग्राउंड जीरो या मैदान पर डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मियों के साथ कदम से कदम मिला  दिख रहा हो उसकी मदद को भी आगे आएं।आम जनमानस से भी यही अपील करेंगे कि जितना भी संभव हो इन मीडिया कर्मियों को अपना सहयोग प्रदान करें, क्योंकि  यह आपको एसी में बैठे और घर में बैठकर या स्टूडियो में बैठकर ख़बरों की तोड मरोड कर इन कैमरे और कलम की रिपोर्ट के आधार पर काट छांट कर ही रिपोर्ट पर अपनी पीठ थपथपा रहे हैैं। आपने कभी नहीं देखा होगा कि स्टूडियो का कर्मचारी आपको ग्राउंड पर दिखे या जो संपादकीय या ऑडिटोरियम में बैठा कर्मचारी काम कर रहा हो वह आपको ग्राउंड पर दिख रहा हूं आपको हमेशा कलम का सिपाही और कैमरा में नहीं ग्राउंड पर काम करता मिलेगा। हां इन लोगों की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है है क्योंकि ये भी दिन रात कलम और कैमरामैन की बात आम जनमानस और सरकार तक पहुचाने का काम पूरी निष्ठा से कर रहे हैं। तालियों, घंटियों शंख ध्वनि से किसी न किसी का  परिवार सुरक्षित होगा ना उसका परिवार का भरण पोषण होगा।  इन मीडिया कर्मियों की संयमित कार्यशैली से सरकार को सही दिशा में कार्य करने का रास्ता तो मिल ही रहा है साथ ही आम जनमानस को सजग भी कर रहे हैं, सतर्क भी कर रहे हैं, आगाह भी कर रहे हैं कि ” बिना वजह घर से बाहर ना निकले, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाएं, अफवाह ना फैलाएं स्वस्थ रहे।

लोक संवाद टुडे के लिए पुष्कर पवार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

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