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कोटद्वार मे सरकारी जमीनों बडा खेल

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

गजब- सफेदपोशो ने बेच दी सरकारी जमीन।

उप जिला अधिकारी व तहसीलदार द्वारा श्रेणी “क” जमीन को श्रेणी”ख” मे अपने स्तर से ही कर दिया तब्दील।
रजिस्ट्रार ने भी आंख मूंद कर दी रजिस्ट्री।
मामला कोटद्वार के नगर निगम वार्ड नंबर 1 ग्रास्टनगंज और वार्ड नंबर 4 गिवंई स्त्रोत के खोह नदी तट पर स्थित आयुर्वेदिक फार्मेसी औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति लिमिटेड की जमीन का है। जिसे समिति के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने ओने पौने दाम में बेच कर सरकार को भारी चुना लगाया है। बताते चलें कि राज्य सरकार द्वारा जिला प्रशासन की ओर से कोटद्वार की आयुर्वेदिक फार्मेसी औद्योगिक उत्पादन सहकारी समिति लिमिटेड को खसरा संख्या 173/1 मे  0.6150 हेक्टेयर जमीन 2006 में आवंटित की थी । लेकिन इस जमीन पर औद्योगिक उत्पादन के नाम पर मात्र दिखावा किया गया, जिस जमीन पर औद्योगिक जड़ी बूटी का उत्पादन होना था जहां पर समिति के पदाधिकारियों ने मिलकर जमीन की औद्योगिक खरीद-फरोख्त कर मोटा मुनाफा कमाया। जमीनों की खरीद फरोख्त का  मामला 2010 से शुरू हुआ, जब समिति के पदाधिकारियों ने 2010 में सहकारी समिति की जमीन को टुकड़ों में बेचना शुरू कर दिया। 2010 से 11 के बीच में समिति ने 7 से 10 लोगों को जमीन बेच डाली। समिति के पदाधिकारी के साथ हमसाज बना तहसील प्रशासन। जिसने श्रेणी “ख” की जमीन को श्रेणी “क” में बदलकर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी कर मुगालते मे रखा। यही नहीं समिति के पदाधिकारीयों ने तहसील प्रशासन के साथ मिलकर 2010- 11 मे खरीदारों के नाम जमीन की रजिस्ट्री कर दी फिर समिति के पदाधिकारियों ने तहसील प्रशासन के साथ हंमसाज होकर 2019 में दाखिल खारिज तक करवा दिया। मामला प्रकाश में आया जब इस जमीन को कुछ लोगों ने सरकारी पट्टे के नाम पर कुछ गरीब परिवारों को बेच दिया। 10 साल से रह रहे गरीब परिवारों तब झटका लगा जब जमीन की रजिस्ट्री धारक मौके पर पहुंचे और उन्होंने उस जगह पर कुछ अन्य लोगों घर बनाए देखा तब उन लोगों द्वारा जमीन पर बसे लोगों को बताया कि उक्त जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम है। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह जमीन खरीदी है। मौके पर बसे परिवारों ने भी कहा कि उन्होने भी उक्त जमीन स्टाम्प पर खरीदी हुई है। इससे जमीन की रजिस्ट्री धारक बौखला गए और उन्होंने मौके पर बसे लोगों के साथ गाली गलौज, जान से मारने की धमकी दी। तथा उनकी झोपड़ियों,मकानों,चारदीवारी व बुनियाद तक तोड़ डाली। यही नही दबंगो ने उन्हें पुलिस में जाने पर भी जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पीडित परिवारों का कहना है कि उन्होंने जमीन प्रॉपर्टी के मालिकों से ली है अगर वहां से हटते हैं तो कहां जाएंगे। उन्होंने उक्त जमीन कर्ज लेकर 50 हजार से चार लाख तक में खरीदी है। 

जब इसकी शिकायत लेकर पुलिस के पास गए थे किसी ने उनका संज्ञान नहीं लिया। तब उसके बाद वे समाज सेवी महेश नेगी के पास पहुंचे,जिन्होंने उनकी शिकायत पुलिस और उपजिलाधिकारी कोटद्वार को लिखित मे दी है। इस बात की खबर जब लोक संवाद टुडे तो चली तो लोक संबाद टुडे की टीम भी मौके पर पहुंची और मामले की सत्यता जानने का प्रयास किया। जिसमें पता चला कि मामला सफेदपोश लोगों द्वारा खेला गया है और इसमें गरीब मजदूर फंस गया। मलाई सफेदपोश चपेट गये। अब देखना है मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस प्रशासन और तहसील प्रशासन कितना जमीन खरीदारों के साथ मे सहयोग करता है और कितना सहयोग दबंग और सफेदपोश को सजा  दिलवाने मे देता है।

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