रिपोर्टर: Author
August 5, 2026
सिंचाई विभाग की लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से सनेह पट्टी के किसान धान की फसल लगाने से बंचित
सिंचाई का पानी यहां सड़कों पर, विभाग के जिम्मेदार अधिकारी गेस्टहाऊस में मौज-मस्ती में
सनेह पट्टी के किसान धान की फसल लगाने के लिए इंद्रदेव पर निर्भर
रिपोर्ट – पुष्कर सिंह पवार
कोटद्वार। देश का अन्नदाता आज जितना बेबस, लाचार और हताश-निराश है उतना शायद देश की आजादी के पिछले सत्तर सालों नहीं रहा होगा। विज्ञान के आधुनिक दौर और अपार संसाधनों के होते हुए भी किसानों का लाचार और बेबस होना निश्चित रूप में सत्तारूढ़ सरकार और किसानों से सम्बंधित विभागों की लापरवाही और अनदेखी कह सकते हैं।
ऐसा ही कुछ उत्तराखंड की मौजूदा सत्तारूढ़ सरकार और उसकी सरकारी मशीनरी का नजर आ रहा है। किसानों का जितना उत्पीड़न,नजरअंदाजी, बेरूखी और उपहास वर्तमान सरकार और उसकी किसानों से जुड़ी मशीनरी द्वारा किया जा रहा है शायद देश के किसी अन्य राज्यों में हो रहा हो।
एक मामला अपने पाठकों और व्यूवर्स को लोक संवाद टुडे बताने जा रहा है जिसमें कोटद्वार में लगभग नौ माह पूर्व पूर्वी खोह नहर जो कि सिद्बबली के समीप ग्रास्टनगंज से लेकर कोटडी़ढांग सनेह तक लगभग पौने पांच करोड़ की लागत से दस किमी नहर का जीर्णोद्धार स्थानीय विधायक और सूबे की विधानसभा अध्यक्ष और स्थानीय फोटोशूट तक सीमित छुटभैय्यों द्वारा हजारों के शामियाने में धूम-धाम से भूमिपूजन कर किया गया। भूमि पूजन के बाद किसान तो इंद्रदेव के भरोसे तीसरी फसल की तैयारी में जुटा है परन्तु सरकार और सरकारी मशीनरी की किसानों की अनदेखी और उपेक्षा के चलते नौ महीने बाद भी नहर का जीर्णोद्धार नहीं हो पाया।
गजब तो यह है कि कोटडी़ढांग सनेह में तो अभी तक न तो नहर के दोनों छोरों की झाड़ियों की सफाई हुई और न ही नहर का जीर्णोद्धार। बरसात के मौसम में नहर के दोनों छोरों पर उगी लैंटाना व अन्य कंटीली झाड़ियों में हिंसक जंगली जानवर ने भी बसेरा बना लिया है तो कई बार स्थानीय लोगों द्वारा लैपर्ड सहित अन्य हिंसक जानवरों को बच्चों सहित देखा है। किसानों को नहर में ट्यूबवेल और नालों के पानी को जैसे तैसे दिन रात कर पानी खेतों तक पहुंचाना होता है तो कभी भी अनहोनी होने की संभावना भी बनी रहती है।
नहर के हालात इतने बदतर है कि रविवार को देर हुई बरसात का पानी नहर की सफाई न होने से सड़कों और घरों के अंदर घुस गया। इसके वावजूद भी न तो सिंचाई विभाग की नींद खुली और न ही स्थानीय छुटभैय्यों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को जानकारी दी होगी लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी कोटद्वार में रहते हुए विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नहर की जीर्णोद्धार का संज्ञान न लेना वर्तमान सरकार का किसानों के प्रति दिखावा वाला चश्मा नजर आ ही गया है। धन्य है ऐसे जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार विभागीय अधिकारी जो किसान हितों के लिए एसी में बैठकर कार्ययोजना बना रहे हैं।



