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बंदरों,सुवरों का आतंक, किसान पस्त,वन विभाग मस्त और जनप्रतिनिधि व्यस्त

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 बंदरों,सुवरों का आतंक, किसान पस्त,वन विभाग मस्त और जनप्रतिनिधि व्यस्त 

 उत्तराखंड के पहाड़ में खेती बाड़ी करना, एवरेस्ट पर पताका फहराना….!

     सुवरों द्वारा मडवे की खेती का हाल, फोटो धीरेन्द्र गुंसाई

 

रिखड़ीखाल/ अंदरगांव, कोटड़ीसैंण। उत्तराखंड के पहाड़ में खेती करने का मतलब एवरेस्ट पर पताका लहराना। जी हां जबसे उत्तराखंड बना या कहेंं पिछले 24 सालों में पहाड़ पर खेती कर परिवार का भरण पोषण कर आत्मनिर्भरता हासिल करना ठीक उसी तरह है जिस तरह एवरेस्ट पर विजय पताका फहराकर सकून पाना।

  बात करते हैं उत्तराखंड के वीवीआईपी जिले पौड़ी जिले की जिस जिले ने पिछले 24 सालों में 4-4 मुख्यमंत्री दिए,संसद में भी गढ़वाल लोकसभा से इसी जिले के जनप्रतिनिधि हावी रहे। उत्तराखंड कैबिनेट मंत्रियों में भी इस जिले का दबदबा रहा। लेकिन वीवीआईपी पौड़ी जिले की तस्वीर जो अंग्रेजी शासनकाल में थी वहीं अब डबल इंजन सरकार में भी नजर आ रही है। हालात यहां तक हो चुके हैं कि खेती बाड़ी से जुड़े जिले के किसान पस्त, वनविभाग मस्त और जनप्रतिनिधि अपने को व्यस्त बताते हुए पहाड़ की जैविक खेती के नाम पर मलाई समेटने में लगे हैं।

  लोक संवाद टुडे ने अपने प्रतिनिधि धीरेन्द्र सिंह गुसाईं के साथ पौड़ी जिले के विकास खंड रिखड़ीखाल के कोटड़ीसैण, अंदरगांव का भ्रमण कर पहाड़ की खेती व किसानों का जायजा लिया तो जो देखा वह पाठकों को बताने का प्रयास किया कि पहाड़ में खेती करना कितना लाभकारी है…..! 

 पहाड़ी महिला का बंदर लंगूरों को भगाने का पहाड़ी जुगाड़ 

 

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