निजी स्कूल बसों पर कार्यवाही
20 स्कूल का चालान, दो बसें सीज
उत्तराखंड/हल्द्वानी। शिक्षा के मंदिरों को व्यवसाय बनाने वाले कुछ निजी स्कूलों द्वारा तमाम अनियमितताएं बरते जाने के कारण स्कूली बच्चों व अविभावको को आर्थिक और जानमाल तक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि पहले तो स्वार्थी और लालची स्कूल संचालकों द्वारा अभिभावकों और विद्यार्थियों का पुस्तकों, स्कूल ड्रेस और भारी भरकम फीस से शोषण किया। उसके बाद इन शिक्षा के नाम पर लूट मचाने वाले संचालकों द्वारा स्कूल बसों के माध्यम से लूट मचानी शुरू कर दी।
बताते चलें कि लूटमार मचाने वाले निजी स्कूलों द्वारा परिवहन विभाग, स्थानीय पुलिस व शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से सांठगांठ कर बिना परमिट, बिना स्कूल मानकों के तहत स्कूल बसों का संचालन, बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ड्राइवर व कनडक्टर, बिना बसों के फिटनेस और ड्राइवर का बिना सीटबेल्ट प्रयोग कर स्कूली बच्चों से भरी बसों को चलाने सहित कई अनियमितताओं को नजरअंदाज कर स्कूली बच्चों और अभिभावकों की जान सांसत में डाली जा रही है।
उत्तराखंड में अधिकांश निजी स्कूल संचालकों द्वारा स्कूल बसों को लेकर बरती जा रही अनियमितताओं की शिकायत पर बुधवार को हल्द्वानी एआरटीओ द्वारा कार्यवाही कर 20 स्कूल बसों का चालान व 2 स्कूल बसों को सीज करने की कार्यवाही की गई।
कोटद्वार में भी स्कूल संचालकों द्वारा स्कूल बसों में भारी अनियमितताओं की शिकायत मिल रही है शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग व पुलिस प्रशासन क्या स्कूल बसों में अनियमितता बरतने पर कार्यवाही कर अभिभावकों व स्कूली बच्चों को सुरक्षित करने अभियान चलाएंगे। इन जिम्मेदार विभागों को सोचना होगा कि उनके परिवार के नौनिहाल भी बसों, टैम्पो और मिनी बसों से स्कूल जाते हैं। देखना अब यह है कि भविष्य की धरोहर और अभिभावकों के संशय को दूर करने के लिए प्रशासन, शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग कब जागेगा…..?

