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August 5, 2026
सेवायोजन कार्यालय के तत्वाधान में रोजगार मेला
90 युवाओं में से 62 युवाओं का चयन
नगर/क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय के तत्वाधान में आज खण्ड विकास कार्यालय कल्जीखाल एवं नैनीडांडा में रोजगार भर्ती मेले का आयोजन किया गया, जिसमें 62 युवाओं का चयन हुआ इस भर्ती मेले में 90 भुवाओं ने भाग लिया।
एस. आई. एस० भर्ती अधिकारी रजनीश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि रोजगार भर्ती मेले में 62 युवाओं का चयन हुआ इस भर्ती मेले में 90 भुवाओं ने भाग लिया, जिसमें शारीरिक मापदण्ड के अनुरूप नयनित युवाओं को एक माह के आवासीय प्रशिक्षण रिजनल ट्रेनिंग एकेडमी सेलाकुई देहरादून में देकर 65 वर्ष स्थाई नौकरी के साथ बड़े-2 औद्योगिक क्षेत्रों में पद स्थापित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि 20 नवम्बर को नगर सेवायोजन कार्यालय पौडी व खण्ड विकास कार्यालय एकेश्वर, दिनाक 22 नवम्बर को खण्ड विकास कार्यालप खिर्सू व पोखड़ा, दिनांक 23 नवम्बर खण्ड विकास कार्यालय पाबौं, दिनांक 24 नवम्बर को खण्ड विकास रिखणीखाल, 25 नवम्बर को खण्ड विकास कार्यालय थलीसैण व जयहरीखाल, 26 नवम्बर को खण्ड विकास कार्यालय द्वारीखाल व दुगड्डा और 27 नवम्बर को खण्ड विकास कार्यालय एकेश्वर में आयोजित किया जायेग। उन्होंने कहा कि इच्छुक अभ्यर्थी जिनकी लम्बाई 169 सेमी, वनज 50 से 90 किग्रा के बीच व हाईस्कूल पास न्यूनतम व 21 से 37 वर्ष के बीच आयु हो। बताया कि अभ्यर्थी 10वीं पास मार्कशीट व आधार कार्ड की फोटोकापी व एक पासपोर्ट साईज फोटो व केवल चयनित अभ्यर्थियों के लिए रूपपे 350/ प्रास्पेक्टस शुल्क के साथ देय होगा। परीक्षापरान्त 12000 से 14000 मासिक मानदेय के साथ पी०एफ, पेंशन, ग्रेज्यूटी, मेडिकल इत्यादि सुविधा देय होगी। अधिक जानकारी के लिये मो० न० 1140281994/8318020726 पर सम्पर्क कर कर सकते है।
नशीली दवाओं के दुरूप्रयोग और नशीली दवाओं के खतरे पर विधिक जागरूकता
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौडी गढ़वाल के तत्वाधान में आज नशीली दवाओं के दुरूप्रयोग और नशीली दवाओं के खतरे एवं अन्य विधिक अधिकारों की जानकारी से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संदीप कुमार तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि माननीय उत्तरखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देशों के अनुपालन में आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौडी गढ़वाल द्वारा सेट थॉमस कान्वेंट स्कूल पौड़ी गढ़वाल में नालसा (नशा पीड़ितों को विधिक सेवाएं एवं नशा उन्मूलन के लिये विधिक सेवाए) योजना 2015 विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित अध्यापकों एवं छात्रों को उनके द्वारा नशीली दवाओं के प्रयोग और नशीली दवाओं के सेवन एवं शराब/सिगरेट की लत से दूर रहने की सलाह एवं समाज को उससे होने वाले खतरे के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। साथ ही विधिक सेवा संस्थानों के क्रियाकलापों, उद्देश्यों तथा नालसा की विभिन्न लाभकारी योजनाओं सूचना का अधिकार मोटरयान अधिनियम विधि विवादित किशोरों के अधिकारों महिलाओं के अधिकारों कोविंड के कारण मृत व्यक्तियों के बच्चों के लिये राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता के बारे में बताया गया व जागरूक किया गया तथा निःशुल्क कानूनी सेवाओं एवं प्रतिकर के सम्बन्ध में भी अवगत कराया गया। साथ ही सभी प्रतिभागीगण को अवगत कराते हुए नशा न करने और न ही किसी को करने देने का संकल्प दिलवाते हुये उक्त संकल्प को आत्मसात करने को कहा गया। उनके द्वारा वहां उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों शिक्षिकाओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने एवं न्यायालयों की मदद से तथा वैकल्पिक विवाद समाधान के माध्यमों से अपने विवादों को सुलझाने के लिये आहवानित किया गया।
जागरूकता कार्यक्रम में सेंट थॉमस कान्वेंट स्कूल पौड़ी गढ़वाल की प्रधानाचार्य तथा विद्यालय के छात्राओं के द्वारा प्रतिभाग किया गया।
संजीवनी बनी आयुष्मानः कंट्रोल में हुई न्यूरो विकार जैसी गंभीर और खर्चीली बीमारी
– योजना के जरिए प्रदेश भर में अब तक 4250 से अधिक मरीजों ने लिया न्यूरोसर्जरी का मुफ्त उपचार
– महंगे खर्च के कारण पूर्व में असाध्य सी समझी जाती थी न्यूरो से संबंधित ब्याधियां
– न्यूरोसर्जरी पर सरकार ने अब तक खर्च की 20 करोड़ से अधिक की धनराशि
देहरादून (राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण): न्यूरोसर्जरी के मामले जितने संवेदनशील और जोखिम भरे होते हैं उतने ही खर्चीले भी होते हैं। इस मरज को साध पाना कभी बिरलों के वश में होता था। उसका कारण भी यही था कि खतरे के निस्तारण पर जितना पैसा खर्च होता है वह ज्यादातर की क्षमता से बाहर होता था। लेकिन अब आयुष्मान ने इस असाध्य सी समझी जाने वाली बीमारी को साधने के लिए हर किसी को ताकत दे दी है। सुखद यह है कि अभी तक योजना के अंतर्गत प्रदेश में 4250 से अधिक न्यूरो मरीजों का मुफ्त में उपचार हो चुका है।
मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की चोटें तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाले विकारों का ज्यादातर मौकों पर कारण बनते हैं। सीधे तौर पर भी देखा जाए तो तंत्रिका विज्ञान अन्य के मुकाबले ज्यादा जटिल रहा है। न्यूरो सर्जरी की गंभीरता के चलते समाज में इसे लेकर भय का होना भी स्वाभाविक है। क्योंकि इस बीमारी से पार पाना पहले जरा भी आसान नहीं था, इसका पहला और एकमात्र कारण इस उपचार का खर्चीला होना था। इलाज तो था लेकिन अधिकांश के बजट से बाहर।
ऐसे उदाहरणों की भी कमी नहीं होगी जब न्यूरो सर्जरी के खर्च को देखते हुए मरीज और उनके परिजनों ने उपचार से हाथ खड़े किए होंगे। समाधान उपलब्ध होने के बाद भी खर्चे की वजह से अधिकांश मरीजों के लिए यह बीमारी लाइलाज सी हो गई थी। जिसका उपचार का खर्च बूते से बाहर हो उस मरज को लाइलाज ही समझा जाएगा।
इसे खुशनसीबी ही कहा जायेगा कि अब आयुष्मान योजना ने खर्चीले इलाज के कारण लाइलाज सी बनी न्यूरो संबंधी ब्याधि का उपचार भी हर किसी में वश में कर दिया है। अभी तक 4250 से अधिक मरीज आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त में न्यूरो सर्जरी का उपचार ले चुके हैं। जिस पर प्रदेश सरकार के 20 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं। हालांकि सरकार और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की मंसा अनुसार जीवन बचाने का कोई मोल नहीं होता लेकिन फिर भी यह आंकड़ा छोटा नहीं है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा संचालित आयुष्मान योजना के तहत तंत्रिका ब्याधि का उपचार कराने वाले लाभार्थियों में दर्जनों मरीज ऐसे हैं जिनके उपचार पर 1 लाख से अधिक खर्च आया है। योजना के तहत देहरादून के 1170 से अधिक, हरिद्वार के 880, टिहरी के 354, पौड़ी के 310, यूएस नगर के 206 से अधिक मरीजों ने न्यूरो सर्जरी का उपचार लिया है।
पौड़ी से जगदंबा पंवार, रक्षित कुमार, देहरादून निवासी दयानंद उन तीमारदारों में हैं जिन्होंने अपने मरीज की न्यूरो से संबंधित परेशानी और पूरे परिवार पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को बेहद नजदीक से महसूस किया है। वह कहते हैं कि इस ब्याधि का उपचार और रिकवरी की तासीर अन्य से एकदम अलग है। इसकी तुलना सामान्य में नहीं की जा सकती। वह कहते हैं कि आयुष्मान योजना न होती तो न्यूरो जैसी जटिल समस्या के बड़े खर्च को उठाना और भी मुश्किल हो जाता। उनके मरीज का मुफ्त मं उपचार हुआ। अन्य व्यवस्थाओं पर खर्चा भले ही हुआ है लेकिन महंगे इलाज में उसकी गिनती के कोई मायने नहीं रह जाते।