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कोटद्वार की राजनीति का आधार क्या जातिवाद है…..?

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 कोटद्वार की राजनीति का आधार क्या जातिवाद है…..? 

जातिवाद क्या विकास से बड़ मुद्दा है…? 

पिछले 21 सालों में कोटद्वार को कितना मिला जातिवाद और विकास की राजनीतिक लड़ाई में!

 क्या 2022 में कोटद्वार की शिक्षित, बुद्धिजीवियों से भरी जनता फिर इतिहास दोहराने का काम करेगी या बनाने का ?

कब तक कांग्रेस बीजेपी के जाल में उलझी रहेगी कोटद्वार की जनता!

कोटद्वार में क्या जनप्रतिनिधी बनने की योग्यता का आधार केवल बीजेपी और कांग्रेस पृष्ठभूमि का होना है।


 कोटद्वार विधानसभा का नेतृत्व हमेशा उत्तराखंड की राजनीति में विशेष भूमिका निभाता रहा है। राज्य के 21 वर्ष में 15 वर्ष तक कैबिनेट मंत्रालय में अपनी पहुंच और पावर रखने वाली विधानसभा में इन 21वर्षो में अगर 15 बड़े काम भी हो गए होते तो कोटद्वार की जनता को किसी तीसरे विधानसभा जनप्रतिनिधी के बारे में सोचने पर विवश नहीं होना पड़ता। कहने को तो कोटद्वार को गढ़वाल के श्रेष्ठ और विकसित शहरों में गिना जाता है लेकिन गढ़वाल के श्रेष्ठ और विकसित शहरों में श्रीनगर गढ़वाल कोटद्वार से इक्कीस साबित होता है। कोटद्वार अगर विकसित है तो जुमलेबाज नेताओं और स्वार्थी जनप्रतिनिधियों के लिए, जिन्हें केवल चारणगाथा करने वाले पसंद है और वे उन्हें ही तवज्जो भी देना पसंद करते हैं। विजन शब्द का तो शायद न तो इन्हें पता है या फिर जानबूझकर अनजान बने रहते हैं। अगर कोटद्वार के जनप्रतिनिधियों में विजन होता तो श्रीनर गढ़वाल से पहले मेडिकल कॉलेज कोटद्वार में होता, गढ़वाल के सबसे अधिक छात्र संख्या वाला महाविद्यालय यूनिवर्सिटी होता, इंजीनियरिंग कालेज यहां होता। लेकिन यहां के जनप्रतिनिधियों ने कोटद्वार को जो भी योजनाओं से जोड़ा उसके साथ साथ विवादों को जोड़ना नहीं भूले। उदाहरण के लिए लालढांग चिल्लरखाल मोटरमार्ग, रामनगर कालागढ़ कोटद्वार और हरिद्वार मोटरमार्ग, कोटद्वार मेडिकल कॉलेज, सिडकुल, कोटद्वार में बनने वाले ईको पार्क,कण्वाश्रम टूरिज्म, कण्वाश्रम झील, कोटद्वार जिला जैसे अन्य विकास योजनाओं के नाम पर भाजपा-कांग्रेस कोटद्वार की शिक्षित और बुद्धजीवी जनता को ही बुद्धु बना रहे हैं। कोटद्वार को मिला तो नगर-निगम, प्राधिकरण, और कोटद्वार से बाहर पाखरौ सफारी कूड़े का अम्बाला वाला ट्रेचिंग ग्राउंड जो नगर निगम के जन्म से ही विवाद और कोटद्वार की जनता के लिए बीमारियों की सौगात,बेस हास्पीटल जो रैफर सेंटर तक सीमित होकर रह गया।जब से बना है चिकित्सकों, टेक्नीशियनों,नर्सों की  कमी का रोना ही रोता रहता है। अब कोटद्वार की जनता को निर्णय लेना होगा कि उन्हें विजनरी जनप्रतिनिधी चाहिए या चेले चपाटों,चारणो की फौज खड़े करने वाले जनप्रतिनिधी का !

 पुष्कर पवार,”पदम”

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