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कोटद्वार में फर्जी पहचान से जमीनें बेचने का गोरखधंधा

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

 कोटद्वार में फर्जी पहचान से जमीनें बेचने का गोरखधंधा 

 पटवारी, तहसीलदार व वकील की कानूनी शह पर भू माफिया भूमिधरों की भूमि लगा रहे ठिकाने 
 कोटद्वार से बाहर नौकरी व व्यवसाय से जुड़े लोगों की भूमियों को फर्जी तरीके से बेचने का गिरोह सक्रिय 

पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को पीड़ित का शिकायती पत्र 

आलोक रावत – पूर्व जिला पंचायत सदस्य 

 कोटद्वार। आजकल उत्तराखंड में कुछ उत्तराखंडी ही अपने लोगों के लिए गड्ढा खोदने का काम इन दिनों थोड़े से लालच के लिए अपना इमान धर्म बेचकर आस्तीन का सांप बनकर करते नजर आ रहे हैं। कहीं कोई अपने नामराशि के साथ धोखा कर रहा है तो कहीं कोई किसी की जमीन दिखाकर दूसरी जमीन बेच दे रहा तो कोई सरकारी कैसरीन जमीन बेचकर किसी भूमिधारी के खेत नं व खाता नं की रजिस्ट्री करवा कर वास्तविक भूमिधरियों को तहसील और थाने के चक्कर लगवा कर मुसीबतों के जाल में फंसा रहे हैं, इसमें कुछ दलाल, सरकारी पटवारी और तहसीलदार आंखें मूंद कर भू-माफिया के लिए हीरे की खान का काम कर रहे हैं। 

बिक्री भूमि की चौदहवीं 

 ऐसा ही कुछ मामला कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नं. 30 के गांव नंदपुर, पट्टी मोटाढांग के वास्तविक भूमिधरी हरीशचंद्र डबराल पुत्र स्व. जीतराम डबराल निवासी ग्राम नंदपुर, पट्टी मोटाढांग कोटद्वार के साथ घटित वाकये से जुड़ा हुआ है। पीड़ित हरीशचंद्र डबराल के कोटद्वार पुलिस को दिए शिकायती प्रार्थना पत्र के अनुसार उनकी भूमिधरी भूमि ग्राम नंदपुर पट्टी मोटाढांग कोटद्वार में खाता संख्या 54 के खेत संख्या 69 मध्ये 0.032 है. व दूसरी भूमि खाता संख्या 82 खेत संख्या 70 मध्ये 0.040 है. भूमि उनके नाम पर दर्ज है। हरीशचंद्र डबराल डबराल के अनुसार उनके नाम राशि व्यक्ति हरीशचंद्र काला पुत्र जीतराम काला निवासी ग्राम नंदपुर पट्टी मोटाढांग ने हमनाम व पिता के हमनाम होने का दुरुपयोग करते हुए मेरी भूमि सावित्री देवी पत्नी दीपक सिंह बिष्ट निवासी पदमपुर कोटद्वार को कूट रचित तरीके से बेच दी। भूमि बिकवाने में हरीशचंद्र काला के पुत्र अमित काला व उप्र. जिला बिजनौर तहसील नगीना ग्राम कहड़वाला सतनाम सिंह पुत्र गुरदीपसिंह ने सहयोगी की भूमिका निभाई। गजब तो यह कि जमीन बिक्री करने वाले हरीशचंद्र काला के नाम से नंदपुर में कोई भूमिधारी जमीन जमीनी दस्तावेजों में दर्ज नहीं है। कैसे हरीशचंद्र काला ने भूमि की चौदहवीं रजिस्ट्री में दर्शा दी…? वकील ने कैसे हरीशचंद्र काला के बेटे को गवाह बना दिया….? कैसे बिना जांचे परखे पटवारी और तहसीलदार ने मूल भूमिधारी की भूमि को खरीदार के नाम दाखिल खारिज तक करवा दिया…? 

रजिस्ट्री में क्रेता – बिक्रेता व गवाह

इस गंभीर मामले मुद्दे पर सबसे बड़ी खामियां जो उजागर हो रही हैं वह यह कि तहसील प्रशासन के भूमि संबंधी मामलों में लक्ष्मी पूजा करने के बाद तहसील प्रशासन धृतराष्ट्र बन जाता है पुलिस शकुनि की तरह चालबाजी करती नजर आती है। वहीं भू-माफिया, जालसाज रावण और दुर्योधन बनकर कानून पर अट्टहास कर अपनी मूंछों पर ताव देते नजर आते हैं। 

 जालसाजी से पीड़ित हरीशचंद्र डबराल ने उनकी भूमिधरी भूमि जालसाजी कर बेचने की शिकायत कोटद्वार कोतवाली में थाना प्रभारी को दिनांक 02-08-24 को की थी परन्तु कोटद्वार थानाप्रभारी द्वारा किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं करने पर पीड़ित हरीशचंद्र डबराल द्वारा 12-08-24 को पुनः पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को लिखित में आनलाइन शिकायत दर्ज करवाई गई। उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक द्वारा पीड़ित की शिकायत का संज्ञान लेकर कोटद्वार साइबर सेल को 27-08-24 को जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

वहीं इस मामले मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य आलोक रावत का कहना है कि जमीन खरीद फरोख्त के फर्जीवाड़े में भू-माफिया के साथ पटवारी और तहसीलदार भी दोषी माने जाने चाहिए क्योंकि ये लोग विना जांच-पड़ताल और मौका मुआयना किए बिना ही दूरी प्रमाण  पत्र, दाखिल खारिज कर रहे हैं कहीं न कहीं इनके तार भू माफिया से जुड़े नजर आते हैं, इसलिए इसकी जांच ईमानदारी करते हुए दोषी पाए जाने पर कानूनी रूप में दंडित किया जाना चाहिए। कोटद्वार में फर्जी तरीके से खरीदने बेचने वाले तहसील प्रशासन और पुलिस से मिलकर जमीनों का घालमेल कर रहे हैं। विना जमीन वाले दूसरे की जमीने बेचकर फर्जी गवाहों, कूट रचित दस्तावेजों के जमीने बेचकर मौज-मस्ती कर रहे हैं और वास्तविक भूमिधरी पुलिस और तहसीलों के चक्कर काटते हुए एड़ियां घिस रहे हैं। 

जमीन की खतौनी व रजिस्ट्री हस्ताक्षर के नमूने 

 इस गंभीर मामले में यह बात स्पष्ट जगजाहिर होती है कि कोटद्वार पुलिस भूमाफियाओं की जेब का खिलौना बन चुकी है। पटवारी भी भू-माफिया रुपी कुबेर की चरण वंदना में लीन है तो धृतराष्ट्र की तरह तहसीलदार भी भू-माफिया रुपी दुर्योधन की पीठ थपथपाते हुए अपने महकमे को शाबाशी दे रहे हैं। 

 वहीं पीड़ित भूमिधारी हरीशचंद्र डबराल ने बताया कि वे कानूनी प्रक्रियाओं से सभी दोषियों को हरसंभव दंडित करने के लिए संघर्ष करेंगे, उन्हें भारतीय न्यायपालिका और न्यायिक प्रणाली पर विश्वास है कि उन्हें न्याय मिलेगा।

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