कोटद्वार में दिल्ली- कोटद्वार रेल सेवा, श्रेय लेने की होड़ में उलझे जनप्रतिनिधि
सनातन परम्परा के अनुसार चंद्र ग्रहण/सूतक काल का उलन्ंघन
पुरानी सेवा को नई साड़ी पहनाकर डबल इंजन का नया आविष्कार
कोटद्वार में कोराना काल में बंद हुई रेल सेवा पुनः शुरू होने पर डबल इंजन की राज्य और केन्द्र सरकार के प्रतिनिधि श्रेय लेने की होड़ में धार्मिक मान्यताओं को भी दरकिनार करते नजर आए। सनातन परंपरा के अनुसार ग्रहण काल में नया कार्य का शुभारंभ अशुभ माना जाता है परन्तु कोटद्वार की जनता को सपने दिखाने वाले जनप्रतिनिधि यह भूल गए कि कोटद्वार की जनता इतनी भोली भी नहीं कि उसे सनातन परंपरा की शुभ अशुभ बेला की जानकारी भी न हो।
गजब तो यह है कि रेल सेवा के शुभारंभ के बड़े बड़े होर्डिंग कोटद्वार की जनता को बता रहे हैं कि रेल सेवा 27 अक्टुबर से शुरू होगी परन्तु हो रही है 28 अक्टुबर को। यही नहीं रेल सेवा 1:30 बजे दिन में शुरू भी हो गई परन्तु कोटद्वार में 3:55 पहुंच भी गई परन्तु उद्घाटन हो रहा है 4 बजे के बाद…..! अब कोटद्वार के ज्योतिष, प्रकांड सनातन परंपरा के पंडित/ पुरोहित बताएं कि ग्रहण काल में शुभारंभ शुरुआत की तिथि के दूसरे दिन उद्घाटन कोटद्वार रेल सेवा पर कितना असरदार होगा।
साथ ही आपको जानकारी देते चलें क यह रेलसेवा नई नहीं वरन् पुराने पर नया रंग कर चमकदार बनाने का डबल इंजन का नया आविष्कार है, बधाई कोटद्वार के……. को।


