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August 5, 2026
कोटद्वार नगर निगम वार्ड नं 3 कोटडीढांग स्थानीय विधायक और सिंचाई विभाग नहीं ले रहे किसानों की सुध
रिपोर्ट -पुष्कर सिंह पवार “पदम”
कोटडीढांग सिंचाई नहर
कोटडीढांग वार्ड नं 3 की सिंचाई नहर,
कोटद्वार। पूरी दुनिया में लोगों को अन्न का दाना पहुंचाने वाला किसान दिन रात, सर्दी , गर्मी हो या बरसात खेतों में रोटी नमक खाकर कठोर परिश्रम कर अन्न उगाता है। लेकिन विकसित देशों को छोड़कर बाकी देशों के किसानों के हालात से सरकारें और हर अन्न खाने वाला भली-भांति परिचित है।
बात करें तो भारतीय किसानों की तो पूरे देश का किसान बद से बदहाल होता जा रहा है। भारत देश के देश व राज्यों में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो केवल घोषणाओं तक सीमित है। जिससे किसानों को आए दिन अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने पड़ रहे हैं, किसान खेतों के बजाय सड़कों व स्थानीय सरकारी विभागों के आगे धरना प्रदर्शन करने को मजबूर है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों के किसानों से संबंधित विभाग चाहे वह कृषि मंत्रालय, उद्यान मंत्रालय , सिंचाई और उर्वरक मंत्रालय हो, कृषि विभाग,उद्यान विभाग हो, किसान कोपरेटिव संस्थाएं हो, बैंक हों, उर्वरक विभाग हो या सिंचाई विभाग सभी विभाग किसानों से परहेज़ करते नजर आ रहे हैं।
बात करें तो उत्तराखंड में किसानों की स्थिति तो यहां लगता है सब राम भरोसे चलता दिखाई दे रहा है। मंत्रालयों में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी हैं जिन्हें खेती किसानी से कोई लेना-देना नहीं…! विभागों में दागी अधिकारी विभागों की शोभा बढ़ा रहे हैं तो कुछ सरकार के मंत्रीयों के आशीर्वाद से सेवाकाल भी बढ़ा ले रहे।
बदहाल सिंचाई नहर के कुलावे
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में अधिकांश क्षेत्र कृषि बाहुल्य है परन्तु कोटद्वार की जनप्रतिनिधि मंत्रालय में मजबूत पोजीशन पर होते हुए भी कृषि आधारित विभागों के अधिकारियों से कार्य करवाने में नाकामयाब हो रही हैं इन विभागों के अधिकारियों विशेषकर कृषि, उद्यान, किसान कोपरेटिव सोसायटियां व सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तो लगता है विधानसभा अध्यक्ष उनके लिए आम जनप्रतिनिधि है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में कोटद्वार की बांई अर्थात पूर्वी खोह नहर के लिए सिंचाई विभाग को लगभग पौने छह करोड़ ग्रासटनगंज से लेकर कोटडीढांग सनेह तक सिंचाई नहर मरम्मत के लिए स्वीकृत किए गए। सिंचाई विभाग के ठेकेदार और विभाग ने सुलभ जगह तो सिंचाई नहर का कार्य पेटी ठेकेदारों से करवा लिया परन्तु जिस क्षेत्र में खेती का क्षेत्रफल अधिक है वहां की नहर सफाई तक ठेकेदार ने नहीं की व विभाग एई,जेई एसी कार्यालय में मौज उड़ाते रहे। कोटडीढांग सनेह के किसान आजकल गेहूं बुवाई में जुटे हैं परन्तु सिंचाई विभाग नहर में नदी का पानी किसानों को नहीं दे पा रहा। किसान ट्यूबवेल के भरोसे है यहां भी विद्युत विभाग अक्सर विद्युत रेगूलर नहीं दे रहा जिससे किसानों को गेहूं की फसल बोने में विलम्ब हो रहा है जिस कारण उनका उत्पादन प्रभावित होना निश्चित है।
पूर्वी खोह नहर के कुलावों की स्थिति
यहां एक और लापरवाही सिंचाई विभाग की देखने को मिल रही है जहां ठेकेदार द्वारा नहर मरम्मत की वहां पानी के कुलावों को भी सही तरह दुरुस्त नहीं किया जिससे जो ट्यूबवेल का पानी ले जाया जाता है वह सहायक गूलों में पूरी तरह नहीं जा पाता जिससे किसानों को आर्थिक नुक़सान भी हो रहा है व समय भी बर्बाद हो रहा है। जो भी हो किसान तो अपने को अंधेरे कुंए में फंसा पा रहा है।




