रिपोर्टर: Author
August 5, 2026
उत्तराखंड के हरे पेड़ों की बली लेकर यूपी को हाईटेंशन लाइन से मिलेगी बिजली
अब लैंसडाउन वन विभाग के जंगलों के हरे पेड़ों की बली लेने की तैयारी
राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित पर्यावरणविदों की चुप्पी हैरान करने वाली
लैंसडाउन वन प्रभाग के कोटद्वार रैंज में हरे पेड़ों का छपान शुरू
बिजली की हाईटेंशन लाइन गुजरने से जंगली जानवर आबादी में करेंगे रूख़
कोटद्वार। गजब है उत्तराखंड के दोगले वनविभाग, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और एनजीटी नियमावलियो का। केंद्र सरकार और राज्य सरकार की डबल इंजन सरकार किस प्रकार मनमाने तरीके से उत्तराखंड जल, जंगल और जमीनों का अनाप शनाप दोहन कर उत्तराखंड की पारम्परिक धरोहर की लूट खसोट अपने चहेतों के लिए कर रही है वहीं उत्तराखंड की आम जनता की दैनिक आवश्यकताओं की जरूरतों को आवश्यकताओं को पूरा करने वाली परियोजनाओं में वनविभाग, वन्यजीव संरक्षण और एनजीटी नियमावलियो की आड़ में रूकावटों का अम्बाला लगाकर दोहरे मापदंड अपना रही है।
वैसे तो उत्तराखंड की आम जनमानस को स्मरण होगा कि चारधाम यात्रा के नाम पर उत्तराखंड के जंगलों को किस तरह कसाई की तरह काटा गया, कितने लाखों भरे पेड़ों पर आरियां चली। कहां है उत्तराखंड के राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित पर्यावरणविद…..! बड़े बड़े जलविद्युत परियोजनाओं में बर्बाद किए जंगल और गांव पर उत्तराखंड के पर्यावरण प्रेमियों की आवाज क्यों बंद है….? पर्यटन के नाम पर उत्तराखंड के जंगलों के बीच बन रहे रिजोर्ट और होटलों पर पर्यावरण प्रेमियों की आवाज तो लगता है उत्तराखंड की जड़ों में जांच डालने का काम कर रही है। ये पर्यावरणविद केवल और केवल अपने निजी स्वार्थ पूर्ति के सरकारी पिट्ठू बनकर उत्तराखंड को खोखला करने का प्रण लिए हैं।
अभी ताजा तीन मामला पौड़ी जिले के लैंसडाउन डिविजन अंतर्गत कोटद्वार रैंज का प्रकाश में आ रहा है जहां जहां सिद्धबली मंदिर के पीछे से लेकर लाल पानी और कोटडी़ रैंज से होकर उत्तर प्रदेश को बिजली की सप्लाई हेतु हाईटेंशन बिजली की लाइन बिछाने के लिए हजारों हरे पेड़ों की बली लेने के लिए आजकल कोटद्वार रैज के द्वारा छपान कार्य किया जा रहा है। वनविभाग के कर्मचारियों ने इसका अंदरूनी विरोध तो किया परन्तु हाईकमान के आगे उन्होंने अपने को विवश पाया,और मजबूरन हरे पेड़ों के पातन के लिए छपान शुरू कर दिया।
गौरतलब है उत्तराखंड में बिजली की दरों में लगातार वृद्धि हो रही है और सम्पत्ति उत्तराखंड की लूटी जा रही है। उत्तराखंड का जल, जंगल और जमीन का उपयोग दूसरे राज्य कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड की जनता अपने लिए सड़क, बिजली और पानी के लिए आंदोलन पर आंदोलन कर सड़कों पर है परन्तु सुनवाई के नाम पर डबल इंजन सरकार स्थानीय लोगों को ही मुजरिम बनाकर मुकदमों और जेलों में ठूंस रही है। इन तमाम मामलों में उत्तराखंड के वे तमाम पर्यावरणविद, वन्यजीव प्रेमी और समाजसेवी पूरी तरह डबल इंजन सरकार के गोद में बैठकर आंदोलन चला कि किस तरह उत्तराखंड को खंड-खंड कर लूटा जाए।
गौरतलब है कि अगर लैंसडाउन डिविजन के कोटद्वार रैंज से होकर हाईटेंशन लाइन गुजरेगी तो जंगली जानवरों का आबादी में दखल होगा जिसकी शुरुआत पहाड़ी क्षेत्रों में हो भी चुकी है। वनविभाग के अनुभवी अधिकारी का भी मानना है कि बिजली की हाईटेंशन लाइन वन क्षेत्र से गुजरने पर उसकी आवाज से वन्यजीव घबराकर मानव आबादी की ओर रूख करेंगे,और उसमें वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं में बढ़ोतरी होगी। ऐसे में कोटद्वार के लोगों को विशेष कर वन क्षेत्र से सटे आबादी क्षेत्र को भविष्य में जंगली जानवरों के प्रकोपों को झेलने के तैयार होना होगा।
लोक संवाद टुडे राज्य और केंद्र सरकार से अनुरोध करता है कि इस हाईटेंशन लाइन को खोह नदी के सहारे अथवा कालागढ़ रामनगर मोटर मार्ग के किनारे किनारे से गुजारें।