कोटद्वार में सरकारी संरक्षण में मोर्चरी से लाश गायब
पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी से लाश रहस्यमय तरीके से गायब
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संदेह के घेरे में
कोटद्वार में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस मानव शरीर के अंगों की अवैध कारोबार में तो नहीं लिप्त ?
जिले के बाहर की एजेंसी से तथा स्वास्थ्य एवं पुलिस के उच्चाधिकारियों से हो निष्पक्ष जांच
कोटद्वार। कोटद्वार में सूत्रों से पता चला है कि पुलिस महकमे की जानकारी में कोटद्वार के पोस्टमार्टम हाउस से एक लाश गायब कर दी गई है। इसकी शिकायत जब पोस्टमार्टम हाउस के सफाई कर्मचारी द्वारा कोटद्वार के सीएमएस को 15 तारीख को दी गई तो 1 सप्ताह बाद सीएमएस काला द्वारा इसकी रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई बताई जाती है। एक सप्ताह बाद रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए क्यों सीएमएस को इंतजार करना पड़ा ?
अब इस लाश के गायब होने के बाद कोटद्वार शहर में चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है। बताया जा रहा है कि कोरोना का हाल में भी कई करोना मरीजों की भी लाश गायब की गई है। यह सब बेस चिकित्सालय के सीएमएस की जानकारी में हुआ है। अगर कोटद्वार के पीएम हाउस से लाश से गायब होती हैं तो, जाती कहां है ? कहीं कोटद्वार में मानव शरीर के अंगों का अनैतिक कारोबार तो नहीं हो रहा ? मानव शरीर के प्रमुख अंगों को अवैध तरीके से बाहर तो नहीं भेजा जा रहा ? यह जांच का विषय तो बनता है। यह सब पुलिस की भी जानकारी में बताया जा रहा है। मीडिया में कोटद्वार के एक दो समाचार पत्रों में ही इस बात का खुलासा हुआ है, बाकी लोग क्या खबर को पचा गए ? या उन्हें खबर की हवा भी नहीं लगी ? कोटद्वार मीडिया भी अब लगता है पुलिस की दावत में मस्त है जिससे की एक खबर दबाने का प्रयास कर रहा था पुलिस को बचाने का काम जो कर रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी से यह भी पता चल रहा है कि पुलिस कह रही है कि लाश उनके द्वारा मोर्चरी से उठाई गई है अगर पुलिस ने यह लाश मोर्चरी से उठाई तो लाश का क्या किया ? इसमें पुलिस की भी जिम्मेदारी बनती है। इस प्रकरण में क्या पुलिस द्वारा सीएमएस की अनुमति ली गई ? पुलिस ने किस उद्देश्य से मोर्चरी से लाश उठाई ? क्या पुलिस के उच्चाधिकारियों को यह जानकारी है ? सवालों का पहाड़ इस रहस्यमई लाश के गायब होने से उठ रहे हैं। लाजमी है पुलिस और कोटद्वार का स्वास्थ्य विभाग संदेह के दायरे में है। इस मामले में प्रशासनिक स्तर जिले के बाहर के अधिकारियों द्वारा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और जांच एजेंसियों से जांच की जानी चाहिए। अगर इस प्रकरण की जांच का खुलासा शीघ्र नहीं हुआ तो निःसंदेह पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को काफी फजीहतों से रूबरू होना पड़ेगा।