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कोटद्वार नगरनिगम बना कूड़े का शहर

रिपोर्टर: Author August 5, 2026

   कोटद्वार नगरनिगम बना कूड़े का शहर 

 निगम का पूर्व पालिका क्षेत्र सहित शहर से सटी कालौनियों में लगे कूड़े के अम्बार 
  

शहर और नगर निगम का दिल सहित तहसील परिसर के बाहर बिखरा पड़ा कूड़ा जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों  और बेबस जनप्रतिनिधियों की काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह लगाता….?

कोटद्वार;कोटद्वार मे सफाई कर्मचारियौ की हड़ताल से चरमराई सफाई ब्यवस्था से पूरे शहर का नक्शा बदला हवा है। शहर के विभिन्न चौराहों से लेकर सरकारी विभागों के बाहर लगे कूड़े के अम्बार बताते हैं कि कोटद्वार शहर अब कूड़े कचडे का शहर बन गया है। चार दिन से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने कोटद्वार नगरवासियों सहित पर्यटकों, शहर के रास्ते आवाजाही करने वाले यात्रियों, स्कूली बच्चों का जीवन खतरे में पड़ गया है। शहर में गंभीर बीमारियों का पनपना शुरू हो गया है। हड़ताल को लेकर सफाई कर्मचारियों और नगर निगम प्रशासन के बीच अस्मिता की जंग चल पड़  है। दोनों पीछे हटने को तैयार नहीं। हालात यह हैं कि एक डाल डाल तो दूसरा पात पात। दोनों की अस्मिता की जंग में कोटद्वार निवासी बलि का बकरा बन गया है। 

 ‌ पूर्व राज्यमंत्री एडवोकेट जसवीर राणा ने कहा कि भाजपा की सरकार की नीतियां सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। सरकार कर्मचारियों की मांग को अनदेखा कर जनता के साथ विश्वासघात कर रही है। जब नगर पालिका को जनभावनाऔ की अनदेखी कर जबरन नगर निगम बनाया जा रहा था तब भाजपा का छोटे कार्यकर्ता से लेकर विधायक मंत्री निगम के फायदे गिना रहे थे कि हजारौ नौकरियां मिलेगी, टैक्स नही लगेगा सफाई ब्यवस्था चुस्त-दुरुस्त होगी वे अब नदारद है। उन्हौने कहा कि भाजपा सरकार उल्टा नौकरियां समाप्त कर रही है,जबरन टैक्स लगा रही है,सफाई ब्यवस्था चौपट है,आवारा पशुओं से स्थानीय लोग परेशान है। सरकार मे जरा सी भी नैतिकता बची है तो तत्काल सफाई कर्मचारियौ की मांग को स्वीकार कर नियुक्त दे ताकि शहर को आशंकित महामारी से बचा जा सके तथा सफाई ब्यवस्था दुरूस्त हो सके।

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