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समाज की चुनौतियों पर स्वाभीमान से जीने की कला बताती चंचल

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रिपोर्टर: Author August 5, 2026

    समाज की चुनौतियों पर स्वाभीमान से जीने की कला बताती चंचल 

दुधमुंहे बच्चे को पेट पर बांधकर चलाती है ई-रिक्शा 

 


नोएडा: समाज में स्वाभिमान से जीना है तो समाज बंधनों रीतिरिवाज़ों पर निडर होकर काबू पाना होगा, चुनौतियों को स्वीकार कर विजय पानी होगी। हर किसी को अपनी जिंदगी में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कुछ लोग इसके आगे घुटने टेक देते हैं. लेकिन कई ऐसे होते हैं जो हर मुश्किलों का डटकर सामना करते हैं। जाहिर है मेहनत का फल भी हमेशा मीठा होता है। नोएडा की एक मां की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन इस महिला ने हिम्मत नहीं हारी. आज वो घर चलाने के लिए अपने बच्चे को गोद में बांध कर ई-रिक्शा चलाती है। ये कहानी है उत्तर प्रदेश की चंचल शर्मा की जिसक हौसले को हर कोई सराहने को दिल से दुवाएं दे रहा है। नोएडा (जिला गौतमबुद्धनगर) की सड़कों पर चंचल अपने एक साल के दुधमुंहे बच्चे को लेकर ई-रिक्शा चलाती हैं. वो पति से अलग अपनी मां के साथ खोड़ा कालोनी में रहती हैं। लेकिन जब उनकी मां सब्जी बेचने जाती हैं तो बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं होता। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चे के लिए आया की व्यवस्था करना मुनासिब नहीं यही कारण है कि जब वो रिक्शा चलाती हैं तो अपने बेटे को पीठ पर बांधकर साथ ले जाती हैं और ई रिक्शा चलाकर अपना, बच्चे का और मां के पेट भरने का स्वाभीमानी तरीका अपनाती है। 

 चंचल के मुताबिक ये चुनौती आसान नहीं है, लेकिन घर चलाने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ता है। उन्होंने ये भी कहा कि बच्चे को पहले वो अपनी मां या फिर बहन के पास छोड़ देती थीं। लेकिन हमेशा ये संभव नहीं होता. अब महीने में 2-3 दिन ही वो बच्चे को छोड़ती हैं। उन्होंने गर्मी के दौरान नोएडा की सड़कों पर ड्राइविंग को भी याद किया, लेकिन उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं था। चंचल ने बताया कि, ‘गर्मी ने उस (बच्चे) पर भारी असर डाला। जैसे ही मैं गाड़ी चलाती वह रोने लगता था।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए चंचल ने कहा कि वो रोजाना 600-700 रुपये के बीच कमा लेती हैं। इस कमाई का लगभग आधा हिस्सा ई-रिक्शा खरीदने के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने में खर्च हो जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चे के लिए दूध की बोतल वो हमेशा साथ रखती हैं. चंचल सेक्टर 62 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल और सेक्टर 59 में लेबर चौक के बीच अपना ई-रिक्शा चलाती हैं।

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