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August 5, 2026
कोटद्वार में जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, शासन व सिंचाई विभाग ने किसानों से बनाई दूरी
किसानों को छोड़ा भगवान भरोसे
कोटड़ीढांग सनेह की नहर
रिपोर्ट – पुष्कर सिंह पवार
कोटद्वार। उत्तराखंड सरकार सहित केन्द्र सरकार समाचार चैनलों, समाचार पत्रों जनसभाओं में भले ही किसानों की आय दोगुनी करने का खूब ढिंढोरा पीटती रहती हो परन्तु जमीन पर हकीकत “ढाक के तीन पात” से ज्यादा कुछ नजर नहीं आता।
ऐसा ही कुछ नजारा उत्तराखंड की वीवीआईपी विधानसभा के कृषि क्षेत्रों का है। कोटद्वार को वीवीआईपी विधानसभा इसलिए कहा गया है क्योंकि इस विधानसभा की विधायक सूबे की विधानसभा अध्यक्ष जो है जिसका राजनीतिक लेबल संवैधानिक रूप में मुख्यमंत्री के समकक्ष या कहें अधिक होता है क्योंकि विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री को भी विधानसभा अध्यक्ष को सम्मान देना होता है।
अंग्रेजों के जमाने की कोटडी़ढांग सनेह की नहर
मामला कुछ यूं है कि कोटद्वार विधानसभा का लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रफल कृषि भूमि का है। सनेह भाबर से लेकर सिगड्डी तक अधिकांश लोग कृषि कार्यों पर निर्भर है तथा आय का प्रमुख स्त्रोत भी कृषि ही है। सनेह भाबर क्षेत्र में अधिकांश कृषि क्षेत्र में धान, गेहूं,जौ,टमाटर, भिंडी फ्रासबीन,हरी सब्जियों सहित आम, लीची,कटहल, चीकू और पपीते की खेती प्रमुखता से की जाती है। अंग्रेजी और यूपी शासनकाल से कृषि को प्रमुखता देते हुए क्षेत्र में सिंचाई नहरों और गूलों का जाल बिछा हुआ था, परन्तु राज्य बनने के बाद स्थानीय प्रशासन, सिंचाई विभाग और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की कृषि की उपेक्षा के साथ साथ किसानों को घृणा से देखा जाने लगा है। शायद इसी का परिणाम है कि राज्य बनने के 24 साल बाद भी सनेह में सिंचाई नहर का न तो जीर्णोद्धार हुवा न ही कभी सुद ली गई। कमोवेश यही स्थिति शिवराजपुर मोटाढांग,मवाकोट,सिगड्डी सहित लालपानी, विशनपुर,जीतपुर, रामपुर कृषि क्षेत्र के गांवों की है। वर्तमान में सनेह क्षेत्र के पूर्वी खोह नहर के लिए सितम्बर अक्टूबर 2023 में लगभग पोने पांच करोड़ स्वीकृत किए गए थे परन्तु स्थानीय कुछ जनप्रतिनिधियों व विधायक व सिंचाई विभाग द्वारा राजनीतिक कारणों से सनेह में नहर निर्माण नहीं होने दिया जा रहा है जिस कारण सनेह के किसानों द्वारा इस वर्ष धान मक्का व दलहनी फसलें उगाना असम्भव है।
कोटडी़ढांग में सिंचाई नहर का सच
लोक संवाद टुडे द्वारा पूर्व में सनेह क्षेत्र की नहर की बदहाल स्थिति के सम्बन्ध में खबर प्रकाशित की थी व व्यक्तिगत रूप में विधायक से यथास्थिति का संज्ञान लेने का अनुरोध किया परन्तु विधायक द्वारा सनेह क्षेत्र में भ्रमण और पुलियों के उद्घाटन के वावजूद जीर्ण-शीर्ण नहर को देखना तक गवारा नहीं किया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड की किसानों की आय दोगुनी करने वाली सरकार और उसके चुने हुए जनप्रतिनिधि किसानों के प्रति कितने संवेदनशील और हितैषी है ं….?


