उत्तराखंड के पहाड़ी नगरीय निकायों पर हाउस टैक्स’ की मार
देहरादून। भाजपा शासित उत्तराखंड सरकार अब डबल इंजन पावर के साथ राज्य के पहाड़ी नगर निकायों को हाउस टैक्स के दायरे ले आई है। अब पहाडो के नगर निकायों में रहने वाले लोगों को हाउस टैक्स देना होगा।इस संबंध में शहरी विकास विभाग ने टेक्स न देने वाले सभी निकायों को नोटिस भेजकर जल्द ही हाउस टैक्स की प्रकिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि राजस्व में वृद्धि की जा सके। हाउस टैक्स के दायरे में आने वाले उत्तराखंड के पहाड़ी नगर निकायों में सतपुली, थैलीसैंण टिहरी, सेलाकुईं, शिवालिक नगर, भगवानपुर, ढंडेरा, पाडली गुर्जर, रामपुर, इमलीखेड़ा, घनसाली, चमियाला, गजा, लम्बगांव, तपोवन, नौगांव, पीपलकोटी, चिन्यालीसौड़, केदारनाथ, ऊखीमठ, तिलवाड़ा, रानीखेत- चिलियानौला, भिकियासैंण, गरुड़, चौखुटिया, कपकोट, बनबसा, बेरीनाग, गंगोलीहाट, नगला, नानकमत्ता, गूलरभोज, लालपुर को नोटिस दिया है। उत्तराखंड के उपरोक्त नगर निकायों के लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी। राज्य में इस समय नगर निकायों की संख्या 102 और वर्तमान में 69 निकाय ही हाउस टैक्स वसूल रहे हैं। जिन 33 निकायों में टैक्स की वसूली न होने से यहां सुविधाएं जुटाने में स्थानीय प्रशासन को कठिनाई हो रही है। केंद्र ने निकायों पर टैक्स कलेक्शन की शर्त लगाई है। हाउस टैक्स निकायों की आय का सबसे अहम जरिया माना जाता है।
