गजब, कोटद्वार में वृद्धाश्रम, संस्कृत विद्यालय और आयुर्वेदिक औषधालय ट्रस्ट गायब
ट्रस्ट की जगह व्यवसायिक/निजी विद्यालय हो रहा संचालित
चैरिटेबल ट्रस्ट संचालकों के परिजनों ने उपजिलाधिकारी से की लिखित शिकायत
वर्षों से विवादित है चैरिटेबल ट्रस्ट की भूमि का मामला, धनबल और राजनीतिक पहुंच से मामला दबाने का चल रहा खेल
शासन प्रशासन से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधियों ने कोटद्वार में स्थित एकमात्र वृद्धाश्रम से मूंदी आंखें
यूपी शासनकाल में वृद्धाश्रम, संस्कृत विद्यालय और आयुर्वेदिक औषधालय होता चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा होता रहा संचालित
महाराष्ट्र/मुम्बई के सामाजिक प्रतिनिधियों के अंशदान से संचालित होता था ट्रस्ट
कोटद्वार। सामाजिक कार्य का मतलब निस्वार्थ समाज सेवा, जिसमें जात-पात, धर्म, अमीर-गरीब से लेकर जरुरतमंद की सेवा से है। परंतु देखने सुनने में आ रहा है कि समाज सेवा अब राजनीतिक स्वार्थ, धन-बल का प्रभाव और समाज में दिखावा कर अपना उल्लू सीधा करना है। कई बे पेंदे के समाजसेवी तो सरकारी सांठ-गांठ से ट्रस्टों, संस्थाओं की सम्पत्तियों का दुरुपयोग या कहें खुर्द-बुर्द करने से बाज नहीं आ रहे।
ऐसा ही एक मामला कोटद्वार के शिवराम वृद्ध निराश्रित आश्रम,उदयरामपुर, पट्टी मोटाढांग, वर्तमान में वार्ड नं 31 किशनपुर, कोटद्वार का है जिसमें चैरिटेबल ट्रस्ट के स्थान पर निजी विद्यालय संचालित है।
ट्रस्ट की सम्पत्ति को खुर्द-बुर्द करने की शिकायत ट्रस्ट में शामिल सदस्य/पदाधिकारी के पौत्र कोटद्वार निवासी गणेश कोठारी द्वारा उपजिलाधिकारी कोटद्वार को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच कर वैधानिक कार्यवाही करते हुए कोटद्वार के एकमात्र आवश्यक वृद्धाश्रम को पुनर्स्थापित करने की मांग की है।