लोक संवाद टुडे की समस्त उत्तराखंडियों को
22वें राज्य स्थापना दिवस की
ढेरों शुभकामनाएं और बधाइयां
कोटद्वार में पहली बार राज्य स्थापना से दूर रहे सत्ताधारी और राष्ट्रीय दल ….!
किसी भी राज्य की स्थापना के बाद राज्य में हर जिले शहर गांव में स्थापना पर कोई न कोई कार्यक्रम राष्ट्रीय दलों द्वारा किया जाता रहा है उसमें चाहे सत्ताधारी हो या सत्ता से बाहर के राष्ट्रीय दल। उत्तराखंड में भी जबसे राज्य बना है राष्ट्रीय दलों की परंपरा रही है कि अपने अपने संगठनों के द्वारा अपने शहरों तहसीलों जिलो और मुख्यालयों पर राज्य स्थापना दिवस पर विभिन्न सांस्कृतिक शैक्षिक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर राज्य स्थापना की खुशियां अपने क्षेत्र के लोगों के साथ मनाई जाएं।
राज्य स्थापना के बाद कोटद्वार विधानसभा मैं पहली बार देखने को मिला कि सत्ताधारी दल होया विपक्षी राष्ट्रीय दल द्वारा न तो कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए न हीं कोई सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और न हीं कोई शैक्षणिक कार्यक्रम। 22 वर्ष के राज्य के इतिहास में कोटद्वार में पहली बार देखने और सुनने को मिला कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने ने अपने निजी कार्यालय से राज्य स्थापना की शुभकामनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से अवश्य जारी की है। यह पहली बार हुआ है कि कोटद्वार जैसी विधानसभा जहां राज्य विधानमंडल में विधान सभा की अध्यक्षता भी कोटद्वार विधानसभा कर रही है न तो सत्ताधारी दल ने कोई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए और नहीं क्षेत्रीय विधायक और उनके दल के कार्यकर्ताओं ने कोई बड़ा सामूहिक कार्यक्रम किया। साफ दिखाई देता है कि उनको राज्य स्थापना दिवस से कोई लेना-देना नहीं रह गया है उन्हें तो केवल सत्ता ही चाहिए। सत्ता के मद में राष्ट्रीय दलों द्वारा कोटद्वार में जिस प्रकार से राज्य स्थापना को नकारा गया वह कहीं ना कहीं कोटद्वार की जनता के दिल में एक बहुत बड़ा घाव कर गया है । कोटद्वार के लोगों की अपेक्षा थी कि राज्य स्थापना पर पूर्व वर्षों क भांति राज्य स्थापना की खुशियां मनाते हैं लेकिन 22 वर्षों के इतिहास में पहली बार कोटद्वार में कोई बड़े आयोजन विशेषकर सत्ताधारी पार्टी द्वारा ना कराए जाने पर लोगों के दिलों में एक बहुत बड़ा घाव कर गया। जिस विधानसभा का नेतृत्व करने वाले विधानसभा के मुखिया भी हैं, उनके सत्ताधारी पार्टी द्वारा भी कोटद्वार में राज्य स्थापना के कार्यक्रम न होना शहर और विधानसभा क्षेत्र में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। वही नगर निगम द्वारा भी कोई कार्यक्रम राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित न कर कोटद्वार की जनता को जता दिया कि उन्हें भी राज्य स्थापना से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तो केवल शहर की दुश्वारियां बढ़ाने से फुर्सत ही कहां।